बांग्लादेश हिंसा: हिंदू युवक दीपू चंद्र दास के चार आरोपियों ने अपराध स्वीकारा, भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या के बाद शव को फांसी से लटका कर आग लगा दी

बांग्लादेश में कट्टरपंथी हिंसा: हिंदू अल्पसंख्यकों की हत्या, आरोपियों ने कोर्ट में कबूली संलिप्तता

शेख हसीना सरकार के खिलाफ कट्टरपंथी गतिविधियों के बीच बांग्लादेश में हाल ही में हिंसा की घटनाओं ने नया रूप ले लिया है। देश में मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की दोबारा घटनाएं सामने आई हैं।

पिछले 10 दिनों में दो हिंदू युवकों की भीड़ द्वारा निर्मम हत्या की गई। दीपू चंद्र दास की हत्या में शामिल चार आरोपियों—तारिक हुसैन (19), मानिक मिया (20), निजामुल हक (20) और अजमल छागिर (26)—ने मयमनसिंह मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में अपने बयान दर्ज कराए। आरोपियों ने हत्या की संलिप्तता स्वीकार की, लेकिन पुलिस ने बताया कि यह संगठित साजिश नहीं थी। बाकी छह आरोपियों को तीन दिन की रिमांड पर रखा गया है और 26 दिसंबर को उन्हें हिरासत में लिया जाएगा।

दीपू चंद्र दास गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था। पुलिस के अनुसार, उसे रात करीब 9 बजे भीड़ ने पकड़ लिया, जिस पर आरोप लगाया गया कि उसने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। गुस्साई भीड़ ने उसे बेरहमी से पीटा और मौत के बाद शव को पेड़ से बांधकर आग लगा दी।

दीपू चंद्र दास के बाद अमृत मंडल उर्फ सम्राट (29) को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। पुलिस ने बताया कि अमृत पर स्थानीय लोगों ने जबरन वसूली का आरोप लगाया था, जिसके बाद भीड़ ने उसे मार डाला।

अधिकारी अब तक आरोपियों के बयान के आधार पर जांच कर रहे हैं और अन्य शामिल व्यक्तियों की पहचान कर रहे हैं।

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