हल्के हथियार और सुरंगों का नक्शा हमास कभी नहीं देगा; ट्रंप के गाजा योजना की परीक्षा अभी बाकी…

इजरायल और हमास के बीच गाजा पट्टी में युद्धविराम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 20-सूत्री योजना के पहले चरण पर दोनों पक्षों ने सहमति जताई है, जिसके तहत अगले 72 घंटों में इजरायली बंधकों की रिहाई और सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों की अदला-बदली होगी।

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या हमास इस समझौते के हिस्से के रूप में अपने हथियार सौंपने को तैयार होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा समझौते के दूसरे चरण में सबसे बड़ा रोड़ा बन सकता है।

इजरायल ने बार-बार स्पष्ट किया है कि अगर गाजा में जारी दो साल पुराना युद्ध समाप्त होना है, तो हमास को अपने सभी हथियार सरेंडर करने होंगे, शासन छोड़ना होगा और स्वयं को संगठन के रूप में भंग करना होगा।

वहीं, हमास ने सार्वजनिक रूप से अपने हथियार छोड़ने से इनकार किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि संगठन ने निजी तौर पर कुछ रियायतें देने के संकेत दिए हैं।

यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (ECFR) के विशेषज्ञ ह्यूग लोवाट ने अल जजीरा को बताया, “जब बात हथियार छोड़ने की आएगी, तो हमास की स्थिति में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है। संगठन के अधिकारियों ने निजी बातचीत में संकेत दिए हैं कि वे हमास के कुछ ‘आक्रामक हथियारों’ को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया पर विचार कर सकते हैं।”

लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि अगर बातचीत हथियारों के मुद्दे पर अटकती है, तो इजरायल फिर से गाजा पर अपना हमला शुरू कर सकता है।

इजरायल रोकेगा खून-खराबा

ट्रंप प्रशासन की मध्यस्थता में मिस्र के शर्म अल-शेख में हुई बातचीत के बाद बुधवार को घोषणा की गई कि युद्धविराम का पहला चरण लागू होगा। इजरायली कैबिनेट ने गुरुवार रात देर से इस पर मुहर लगा दी।

इसके तहत इजरायली सेना गाजा के कुछ हिस्सों से पीछे हटेगी, मानवीय सहायता के 600 ट्रक प्रतिदिन प्रवेश करेंगे, और बंधकों की रिहाई प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

हमास ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा है कि यह “फिलिस्तीनी राष्ट्रीय सहमति” पर आधारित है। हालांकि, योजना के दूसरे चरण में हमास को गाजा की भविष्य की सरकार में कोई भूमिका न निभाने और अपने हथियारों को “स्वतंत्र निगरानीकर्ताओं” के हवाले करने का प्रावधान है।

अंतरराष्ट्रीय कानून और हथियारों का अधिकार

अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत, किसी भी सशस्त्र समूह को कब्जे के खिलाफ हथियार उठाने और प्रतिरोध करने का अधिकार है।

लेकिन इजरायल और उसके पश्चिमी सहयोगी लंबे समय से यह मांग करते आए हैं कि किसी भी शांति प्रक्रिया से पहले फिलिस्तीनी गुट अपने हथियार छोड़ दें।

यही नीति 1990 के दशक में हुए ओस्लो शांति समझौतों की भी आधारशिला थी। अब भी इजरायल उसी मॉडल पर आगे बढ़ना चाहता है, लेकिन इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप (ICG) के शोधकर्ता और गाजा निवासी अज्मी केशावी का कहना है कि “हमास पूरी तरह से हथियार सरेंडर नहीं करेगा।”

उन्होंने कहा, “हमास शायद कुछ आक्रामक हथियार- जैसे छोटी और लंबी दूरी की मिसाइलें सौंपने पर विचार कर सकता है, लेकिन हल्के हथियार या अपनी सुरंगों का नक्शा कभी नहीं देगा। ये सुरंगें दशकों में बनी हैं और इजरायल के खिलाफ प्रतिरोध का हिस्सा हैं।”

केशावी के अनुसार, “हमास तभी हथियार छोड़ेगा जब एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र स्थापित हो जाएगा और उस पर फिलिस्तीनी नेतृत्व का नियंत्रण होगा।”

गाजा में हथियारबंद गुटों की स्थिति

7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा दक्षिणी इजरायल पर हमले के बाद शुरू हुए युद्ध से पहले हमास गाजा का सबसे बड़ा सशस्त्र गुट था।

इसके अलावा इस्लामिक जिहाद, पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फिलिस्तीन (PFLP) और अल-अक्सा शहीद ब्रिगेड जैसे गुट भी सक्रिय थे। हालांकि, इजरायल की दो साल लंबी बमबारी के बाद इन गुटों की मौजूदा क्षमता अस्पष्ट है।

आंतरिक सुरक्षा और इजरायल की भूमिका पर आरोप

गाजा निवासी तगरीद खोदारी के अनुसार, “इजरायल ने युद्ध के दौरान गाजा में कुछ गिरोहों को बढ़ावा दिया, ताकि वे मानवीय सहायता की लूटपाट कर सकें और लोगों में डर फैलाएं।”

उन्होंने कहा, “अब जब इजरायल हमास को हटाना चाहता है, तो गाजा के बहुत से लोग मानते हैं कि सुरक्षा बनाए रखने के लिए हमास का कुछ सैन्य ढांचा बचा रहना जरूरी है।”

खोदारी ने कहा, “हमास आंतरिक सुरक्षा प्रदान करने में बेहद सक्षम है। अगर यह संरचना हटा दी गई, तो गाजा में अराजकता फैल सकती है।”

आंशिक निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय निगरानी बल

लोवाट ने कहा कि हमास संभवतः एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा टास्क फोर्स के साथ सीमित सहयोग पर राजी हो सकता है, जो उसके कुछ हथियारों के आंशिक निरस्त्रीकरण की निगरानी करे।

लेकिन यह तभी संभव होगा जब उस बल का जनादेश “आतंकवाद विरोधी” कार्रवाई से जुड़ा न हो। उन्होंने चेतावनी दी, “अगर पश्चिमी देश इस टास्क फोर्स को आतंकवाद विरोधी एजेंसी बनाते हैं, तो यह सीधे इजरायल के हितों को साधेगी और हमास इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा।”

‘हमास एक विचार है, संगठन नहीं’

इजरायल लगातार यह दावा करता आया है कि उसका युद्ध लक्ष्य हमास को पूरी तरह खत्म करना है। लेकिन केशावी का मानना है कि “हमास को कभी पूरी तरह पराजित नहीं किया जा सकता।”

उनके अनुसार, “हमास आने वाले वर्षों में गाजा के हजारों बेरोजगार और निराश युवाओं को अपने साथ जोड़ लेगा। बहुतों के लिए हमास सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि प्रतिरोध का प्रतीक है।”

उन्होंने कहा, “हमास ने अरब दुनिया को दिखा दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद इजरायल का मुकाबला किया जा सकता है, भले ही इसकी कीमत बहुत भारी रही हो।”

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