केरल हाई कोर्ट के जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन ने सजा काट रहे एक दोषी के लिए नियम बदल दिया और उसे 5 दिनों की आपातकालीन छुट्टी मंजूर कर दी।
दरअसल, खबर है कि दोषी की बेटी पढ़ाई पूरी करने के बाद वकील के रूप में रजिस्टर होने जा रही थी और उस मौके पर वह वहां मौजूद रहना चाहता था।
जज साहब ने कहा कि एक अदालत बेटी की इच्छा से मुंह नहीं मोड़ सकती। जबकि, लोक अभियोजक ने इस याचिका का विरोध किया था और कहा था कि आपातकालीन छुट्टियां सभी निजी आयोजनों के लिए नहीं दी जा सकती।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने कहा कि आमतौर पर ऐसे मौकों के लिए दोषियों को छुट्टी नहीं दी जा सकती, लेकिन बेटी के नामांकन कार्यक्रम के मामले में मानवीय नजरिया रखने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘एक युवती ने अपनी एलएलबी कोर्स पूरा किया और उसका सपना वकील के तौर पर नामांकन करना है। उसका मकसद पिता की मौजूदगी में ऐसा करना है, जो अभी जेल में है।’
उन्होंने कहा, ‘भले ही याचिकाकर्ता दोषी है’ और पूरी दुनिया उसे अपराधी मानती है, लेकिन पिता हर बच्चे की नजर में हीरो होता है।
उस युवती को उसके पिता की मौजूदगी में नामांकन करने दीजिए। यह अदालत बेटी की भावनाओं से आंखें बंद नहीं कर सकती।
मामले के हालात और तथ्यों को देखते हुए और बेटी की भावनाओं पर विचार करते हुए, मेरा मानना है कि याचिकाकर्ता को 5 दिनों की छुट्टी दी जा सकती है।’
दोषी तवानुर केंद्रीय कारागार और सुधार गृह में बंद था और उसने 10 से 14 अक्तूबर के लिए आपातकालीन छुट्टी की मांग की थी। 17 सितंबर को जारी आदेश में जेल अधिकारियों ने उसका आवेदन अस्वीकार कर दिया था।
इसके बाद उसने हाईकोर्ट का रुख किया और अस्थाई रिहाई की मांग की। दोषी के वकील का कहना था कि याचिकाकर्ता की बेटी ने कन्नूर से एलएलबी पूरा किया है और 11 और 12 अक्तूबर को उसका नामांकन होना है।
कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि एक रूटीन के तौर पर दोषियों को छुट्टी नहीं दी जा सकती, लेकिन यह मामला अलग है। कोर्ट ने कहा कि बेटी के नजरिए से देखें तो ऐसे कार्यक्रम में पिता की मौजूदगी की भावात्मक अहमियत काफी ज्यादा है और कोर्ट इससे मुंह नहीं मोड़ सकती।
कोर्ट ने जेल अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि दोषी को अस्थाई रूप से रिहा किया जाए।