लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC) के मुख्य कार्यकारी पार्षद और भाजपा नेता ताशी ग्याल्सन ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा में चार की मौत की निंदा की है।
उन्होंने इसे इतिहास का सबसे काला दिन करार दिया। ग्याल्सन ने एएनआई को बताया, ‘निर्दोष लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए आए थे। हमें नहीं पता कि किस तरह की भीड़ जुटाई गई, लेकिन अचानक हिंसा शुरू हो गई।
4 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। यह हमारी इतिहास का सबसे काला दिन है।’ प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग की उन्होंने आलोचना की।
ताशी ग्याल्सन ने पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों से जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा, ‘जब हिंसा भड़की तब पुलिस की ओर से बहुत सख्ती बरती गई। इसके चलते चार युवाओं की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए। हिंसा को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए। हिंसा को नियंत्रित करने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।’
एलएएचडीसी अध्यक्ष ने कहा कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की ओर से शुरू किया गया अनशन शांतिपूर्ण था। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार समय-समय पर बातचीत कर रही थी, लेकिन नैरेटिव फैलने लगा कि सरकार गंभीर नहीं है, जिसके कारण कुछ लोगों ने उकसाने वाले बयान दिए।
आंदोलन कैसे हो गया हिंसक?
बीजेपी लीडर ग्याल्सन ने कहा, ‘अनशन शुरू में काफी शांतिपूर्ण था और यह एक बड़े मकसद के लिए था। लद्दाख के लोग थोड़े चिंतित थे, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं थी, क्योंकि सरकार समय-समय पर बातचीत कर रही थी और मुद्दे का समाधान निकालने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया था कि लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा मिलेगी। इसके बावजूद, नैरेटिव फैलने लगा कि सरकार बातचीत को लेकर गंभीर नहीं है और संवैधानिक सुरक्षा के संबंध में कुछ नहीं करेगी। कुछ लोगों ने उकसाने वाले बयान देना शुरू कर दिया।’
उन्होंने लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता से 24 सितंबर को हुई हिंसा की घटना की जांच करने की मांग रखी है।