ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने संकेत दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के बाद फिलिस्तीनी देश को औपचारिक रूप से मान्यता देंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्रिटेन की दूसरी राजकीय यात्रा हैं।
ऐसे में माना जा रहा था कि ट्रंप ब्रिटेन से फिलिस्तीन को लेकर कोई कदम न उठाने का आग्रह कर सकते हैं। लेकिन अब ब्रिटिश पीएम ने संकेत दिया है कि वे फिलिस्तीन को मान्यता देकर रहेंगे।
बता दें कि ट्रंप की यह दूसरी ब्रिटेन यात्रा है, जो बुधवार 17 सितंबर को शुरू हुई।
ब्रिटिश अखबार ‘द टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीएम स्टार्मर नहीं चाहते कि ट्रंप की राजकीय यात्रा के दौरान यह मुद्दा संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में हावी हो, इसीलिए वे फिलिस्तीन को मान्यता देने की घोषणा को टाल रहे हैं।
यात्रा के दौरान विंडसर कैसल में बीटिंग रिट्रीट सैन्य समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें स्टार्मर और उनकी पत्नी लेडी विक्टोरिया स्टार्मर भी मौजूद रहीं। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस गुरुवार 18 सितंबर को निर्धारित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लेबर पार्टी के अंदरूनी दबाव के कारण स्टार्मर जल्दबाजी में फिलिस्तीन को मान्यता देने का कदम उठा रहे हैं और यह फैसला संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) से पहले लिया जा रहा है, जहां 23 सितंबर से उच्च स्तरीय बैठकें शुरू होंगी।
इस फैसले की पृष्ठभूमि गाजा में चल रहे युद्ध से जुड़ी है, जो 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से शुरू हुआ था।
इस हमले में 1,200 इजरायली मारे गए थे और 251 बंधकों को ले जाया गया था। वर्तमान में 48 बंधक अभी भी कैद में हैं, जिनमें से लगभग 20 जीवित माने जा रहे हैं।
जुलाई 2025 में स्टार्मर ने घोषणा की थी कि ब्रिटेन सितंबर में फिलिस्तीनी देश को मान्यता देगा।
अमेरिका और इजरायल का विरोध
अमेरिका इस कदम का कड़ा विरोध कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दी है कि यदि संयुक्त राष्ट्र महासभा शिखर सम्मेलन में फिलिस्तीन को मान्यता दी जाती है, तो इजरायल ‘जवाबी’ कार्रवाई कर सकता है।
रुबियो ने कहा, “इजरायल वेस्ट बैंक को विलय करने जैसी कार्रवाई कर सकता है।”
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस कदम की निंदा की है।
उन्होंने कहा, “ब्रिटिश सरकार का यह कदम हमास के दानवी आतंकवाद को पुरस्कृत करता है।” इजरायली राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भी कहा, “ब्रिटेन का फिलिस्तीनी देश को इस समय मान्यता देने का इरादा बंधकों को घर लाने में मदद नहीं करेगा, फिलिस्तीनियों की मदद नहीं करेगा या संघर्ष को समाप्त करने में सहायक नहीं होगा।
यह केवल मध्य पूर्व और उसके बाहर चरमपंथियों को प्रोत्साहित करेगा।”
फ्रांस के नेतृत्व में कई देश अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा शिखर सम्मेलन में फिलिस्तीनी देश को मान्यता देने की योजना बना रहे हैं। लेबर पार्टी के भीतर से स्टार्मर पर दबाव बढ़ रहा है कि ब्रिटेन इस कदम को पहले उठाए।
ब्रिटेन की हालिया कार्रवाइयां
गाजा युद्ध के 23 महीने पूरे होने के साथ इजरायल का अंतरराष्ट्रीय अलगाव बढ़ रहा है। ब्रिटेन ने जून में इजरायली मंत्रियों इतमार बेन ग्विर और बेजालेल स्मोट्रिच पर प्रतिबंध लगाए थे।
इसके अलावा, इजरायल के साथ व्यापार वार्ताओं को स्थगित कर दिया गया और पिछले महीने लंदन में आयोजित हथियार मेला से इजरायली रक्षा कंपनियों को प्रतिबंधित कर दिया गया।
अगले वर्ष से रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में इजरायलियों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। 9 सितंबर को लंदन में फिलिस्तीनी देश की मान्यता की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन भी हुआ था।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन और यूएन समिट
ब्रिटेन का यह कदम फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों के साथ तालमेल में है, जो अगले हफ्ते यूएन समिट में फिलिस्तीनी को मान्यता देंगे।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जुलाई में पहला कदम उठाया था, जिसे जी-7 का सबसे बड़ा यूरोपीय देश मानते हुए महत्वपूर्ण माना गया।
फिलहाल भारत सहित 140 से अधिक देश फिलिस्तीन को देश की मान्यता दे चुके हैं, लेकिन ब्रिटेन और फ्रांस जैसे पश्चिमी शक्तियों का समर्थन इसे प्रतीकात्मक रूप से मजबूत करेगा।