काश पटेल ने ट्रंप के आगे टेके घुटने, बर्खास्त FBI के तीन अधिकारियों ने ठोका मुकदमा…

अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को एक मुकदमा दायर करते हुए एफबीआई निदेशक काश पटेल और अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी पर आरोप लगाया कि उन्हें पिछले महीने गलत राजनीतिक कारणों से बर्खास्त किया गया।

मुकदमे में दावा किया गया है कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के ‘प्रतिशोध अभियान’ का हिस्सा थी, जिसमें ट्रंप के प्रति ‘पर्याप्त राजनीतिक वफादारी’ न दिखाने वाले अधिकारियों को निशाना बनाया गया।

मुकदमा दायर करने वालों में ब्रायन ड्रिस्कॉल, स्टीव जेनसन और स्पेंसर इवांस शामिल हैं। ये तीनों उन पांच अधिकारियों में से हैं जिन्हें पिछले महीने सेवा से हटाया गया।

शिकायत में कहा गया है कि एफबीआई निदेशक काश पटेल ने खुद स्वीकार किया था कि एजेंटों को उनके द्वारा की गई जांच के आधार पर हटाना “संभवतः अवैध” है, लेकिन ट्रंप प्रशासन और न्याय विभाग का दबाव इतना अधिक था कि वे रोक नहीं सके। पटेल ने कथित तौर पर ड्रिस्कॉल से कहा था, “एफबीआई ने राष्ट्रपति को जेल भेजने की कोशिश की थी और वह इसे भूले नहीं हैं।”

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पटेल ने शपथ लेने के तहत वादा किया था कि ‘सभी एफबीआई कर्मचारियों को राजनीतिक प्रतिशोध से बचाया जाएगा’, लेकिन वास्तविकता में उन्होंने ट्रंप प्रशासन के दबाव में झुकते हुए संविधान और संघीय कानूनों का उल्लंघन किया।

ड्रिस्कॉल ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में एक महीने के लिए कार्यवाहक निदेशक रहे। उनको कथित तौर पर एक सैनिक और सम्मानित एजेंट को बर्खास्त करने से इनकार करने के लिए निशाना बनाया गया।

जेन्सन को काश पटेल ने ही वाशिंगटन फील्ड कार्यालय का प्रमुख नियुक्त किया था, लेकिन जनवरी 6 हमले से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका के कारण उन्हें ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा।

मुकदमे में कहा गया है कि पूर्व एजेंट डैन बोंगिनो और अन्य ट्रंप समर्थकों ने सोशल मीडिया पर जेन्सन के खिलाफ अभियान चलाया, जिसके बाद पटेल ने उन्हें ‘कार्य प्राथमिकताओं में देरी’ का बहाना बनाकर बर्खास्त कर दिया।

इवांस को कोविड-19 महामारी के दौरान एफबीआई के मानव संसाधन विभाग में वैक्सीन छूट अनुरोधों की समीक्षा करने के लिए निशाना बनाया गया, जहां एक पूर्व एजेंट ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ शिकायतें कीं और पटेल तक पहुंच बनाए रखी।

मुकदमे में ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, जैसे स्टेफन मिलर (मुख्य घरेलू नीति सलाहकार) और पूर्व कार्यवाहक उप-महान्यायवादी एमिल बोवे का भी जिक्र है, जिन्होंने कथित तौर पर ट्रंप-विरोधी जांचों में शामिल एजेंटों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया।

मुकदमे में क्या मांगा गया?

  • बर्खास्तगी को अवैध घोषित करने की मांग।
  • अधिकारियों की पुनर्बहाली और बकाया वेतन।
  • प्रतिष्ठा बहाल करने के लिए सार्वजनिक मंच पर सफाई देने का अवसर।

वकीलों का कहना है कि इस बर्खास्तगी ने न केवल अधिकारियों के करियर पर चोट पहुंचाई है, बल्कि उनके भविष्य के रोजगार के अवसर भी सीमित कर दिए हैं।

एफबीआई में “राजनीतिक आदेश” का आरोप

मुकदमे में पटेल और तत्कालीन अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी, एफबीआई, न्याय विभाग और राष्ट्रपति कार्यालय को प्रतिवादी बनाया गया है। एजेंटों के वकील एबी लॉवेल का कहना है, “यह मुकदमा साबित करता है कि एफबीआई नेतृत्व कानून प्रवर्तन अधिकारियों को उनके काम के लिए दंडित करने के राजनीतिक आदेश मान रहा है।”

प्रमुख अधिकारी और विवादास्पद घटनाक्रम

ब्रायन ड्रिस्कॉल: एफबीआई के होस्टेज रेस्क्यू टीम के कमांडर रहे और अस्थायी निदेशक भी बने। उन्होंने जनवरी 2021 में कैपिटल हिल दंगे की जांच करने वाले एजेंटों की सूची देने से इनकार किया था।

स्टीव जेनसन: वॉशिंगटन फील्ड ऑफिस का नेतृत्व किया। मुकदमे में दावा किया गया कि उन्हें भी दबाव डालकर ट्रंप-संबंधित मामलों पर काम करने वाले एजेंटों को हटाने को कहा गया।

स्पेंसर इवांस: कोविड-19 महामारी के दौरान एचआर डिवीजन के प्रमुख रहे। वैक्सीन छूट अनुरोधों की समीक्षा करने के कारण वह आलोचनाओं के घेरे में आए और अंततः उन्हें भी हटाया गया।

प्रतिष्ठा को धक्का

मुकदमे में कहा गया है कि पटेल ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया था कि “एफबीआई को हथियार बनाने वाले हर व्यक्ति को नेतृत्व पद से हटा दिया गया है।” अधिकारियों का आरोप है कि इस बयान से उन्हें “झूठा और बदनाम” किया गया तथा उनकी पेशेवर छवि धूमिल हुई।

एजेंसी का बयान

एफबीआई ने इन आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि दशकों का अनुभव रखने वाले इन वरिष्ठ अधिकारियों की बर्खास्तगी ने एजेंसी की कार्यसंस्कृति और मनोबल पर गहरा असर डाला है।

उनके वकील क्रिस मत्ती ने कहा, “ये अधिकारी उन मानकों का प्रतीक थे जिनकी ओर एफबीआई के अन्य कर्मचारी देखते थे। इनकी बर्खास्तगी से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा कमजोर हुई है।”

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