शिवसेना नेता संजय निरुपम ने बुधवार को दावा किया कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) समेत विपक्षी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (INDIA) गठबंधन के 16 सांसदों ने उपराष्ट्रपति के चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन के पक्ष में मतदान किया।
राधाकृष्णन को मंगलवार रात विपक्षी उम्मीदवार और उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी के 300 वोट के मुकाबले 452शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा कि रेड्डी को 315 वोट मिले।
राउत ने कहा कि राधाकृष्णन को दरअसल 300 वोट ही मिले, जबकि वास्तव में 15 अवैध वोट उनके पक्ष में डाले गए।
निरुपम ने एक प्रेस वार्ता में दावा किया, ‘INDIA गठबंधन के 16 सांसदों ने NDA उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया, जिसमें (शिवसेना) UBT गुट के पांच सांसद शामिल थे।
(राकांपा के) शरद पवार गुट के सांसदों ने भी NDA उम्मीदवार का समर्थन किया और उनकी जीत सुनिश्चित की।’
चुनाव से पहले रेड्डी की जीत को लेकर विश्वास जताने के लिए विपक्ष पर निशाना साधते हुए निरुपम ने कहा कि चुनाव के नतीजों से यह स्पष्ट हो गया है कि ‘इंडी’ गठबंधन पूरी तरह से बिखरा हुआ है, जबकि NDA एकजुट है। शिवसेना में निरुपम के सहयोगी और पार्टी सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी राधाकृष्णन की जीत के बाद विपक्ष पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि कभी-कभी अंतरात्मा की आवाज पार्टी व्हिप पर भारी पड़ जाती है और उन्होंने इस महत्वपूर्ण चुनाव में संभावित ‘क्रॉस-वोटिंग’ का भी जिक्र किया।
शिंदे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘INDIA गठबंधन और महा विकास आघाडी (एमवीए) में हमारे उन दोस्तों का विशेष धन्यवाद जिन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी और NDA का समर्थन किया। कभी-कभी अंतरात्मा की आवाज पार्टी व्हिप पर भारी पड़ जाती है।’
‘क्रॉस-वोटिंग’ के आरोपों को खारिज करते हुए राउत ने कहा कि इस तरह के बयान देने वाले अपनी पार्टी (शिवसेना) के वफादारों का अपमान कर रहे हैं।
राउत ने कहा कि सत्ता और पैसे वाले लोग केवल 10 से 12 वोट की ‘क्रॉस-वोटिंग’ सुनिश्चित कर सकते हैं। राउत ने कहा, ‘हमें अंदाजा था कि ये 12 वोट किसके हो सकते हैं। हम न तो नाराज हैं और न ही निराश। हम 300 वोट मिले जो कोई छोटी संख्या नहीं है।’
उन्होंने कहा कि नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजू जनता दल (बीजद), के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने हमेशा महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार का समर्थन किया है।
राज्यसभा महासचिव और निर्वाचन अधिकारी पी. सी. मोदी के अनुसार 781 में से 767 सांसदों ने अपने वोट डाले। उन्होंने कहा कि 752 मतपत्र वैध थे और 15 अवैध, जिससे प्रथम वरीयता के मतों का आवश्यक बहुमत घटकर 377 रह गया।