सैयद जावेद हुसैन (सह संपादक – छत्तीसगढ़):
धमतरी- दुनिया में पेड़ों की घटती संख्या से जहां एक ओर जलवायु में भारी परिवर्तन आ चुका है, जिसका सीधा असर आज हम सबके सामने है, गर्मी, बारिश, ठंड के मौसम अपनी अनुकूलता खोते चले जा रहे हैं, जिसे लेकर देश दुनिया के तमाम वैज्ञानिकों से लेकर जागरूक लोगों में भारी चिंता छाई हुई है।
आज लगभग दुनिया का हर देश वृक्षारोपण को लेकर बहुत ही गंभीर नज़र आ रहा है।
हमारे देश भारत की स्थिति भी वनों को लेकर कोई बहुत अच्छी नहीं है, जिसके मद्देनजर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “एक पेड़ मां के नाम” से एक सार्थक अभियान शुरू किया है, जिसे पूरा देश हाथों हाथ ले रहा है।
लेकिन जिले की ग्राम पंचायत कोलियारी में शायद इस अभियान की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि जहां एक ओर पूरा देश वृक्षारोपण में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहा है तो इसके उलट ग्राम पंचायत कोलियारी में हरे भरे पेड़ों को काट दिया गया है।
बता दें यहां सरपंच पति ने एक ही झटके में पंचायत भवन में लगे लगभग 12 बड़े बड़े विशाल काय पेड़ों को काट डाला।
पंचायत की सरपंच ने न ही संबंधित विभाग से अनुमति लेने की ज़हमत उठाई और न अपनी ही पंचायत के अन्य पंचों से कोई सलाह मशविरा किया, न पंचायत प्रस्ताव, न ग्राम सभा! बस अपने पद का पावर दिखाते हुए सरपंच व उसके पति ने लगभग 12 पेड़ काट डाले।
इस मामले में जब हमने सरपंच से बात की तो उनका कहना था कि पेड़ों से कचरा होता था, साफ सफाई में दिक्कत होती थी, पेड़ों की शाखें बिजली के तारों को छूती थी, इसलिए हमने पेड़ों को कटवा दिया, अब उनकी जगह पर फूलदार, फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं।
जबकि इस सरपंच को इतनी जानकारी होनी चाहिए कि किसी भी बड़े पेड़ को काटने से पहले वन विभाग या एसडीएम. से अनुमति लेनी होती है, इसके अलावा पेड़ की शाखें अगर बिजली के तारों को छू रही हैं, तो उसके लिए विद्युत विभाग को सूचना दी जा सकती है! अगर इतनी भी जानकारी इस सरपंच को नहीं है तो फिर क्या वो अपनी पंचायत का विकास करेगी? ये एक बड़ा सवाल है।
एक छोटीे सी पंचायत भवन में 12 बड़े बड़े विशाल पेड़ों को काट देना पूरे देश के उन तमाम वृक्षारोपण करने वाले प्रकृति प्रेमियों के मुंह पर तमाचा है, जो प्रकृति के संतुलन को सुधारने में जुटे हुए हैं।
बहरहाल इस मामले में अनुविभागीय दंडाधिकारी धमतरी पीयूष तिवारी ने कहा कि इस मामले की जांच कर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
अब देखना दिलचस्प होगा कि “एक पेड़ मां के नाम” पे 1 पेड़ लगाने वाले अधिकारी 12 पेड़ों की कटाई पर किस तरह की कार्यवाही करेंगे।