आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री करुमूरी वेंकट नागेश्वर राव को शराब परिवहन टेंडर मामले में बड़ा झटका लगा है. अपने खिलाफ प्रवर्तन निदेशाल (ईडी) की जांच को चुनौती देते हुए अग्रिम जमानत की गुहार लगाते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया.
इस मामले में तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राव की अग्रिम जमानत याचिका तीन जुलाई को ही खारिज कर दी थी. यह आंध्र प्रदेश के मुख्य शराब घोटाला मामले से अलग है.
शराब परिवहन से जुड़े मामले की जांच एक अलग ‘प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट’ (ईसीआईआर) के तहत की जा रही है. सुनवाई के दौरान नागेश्वर राव के वकील ने कहा कि पूर्व मंत्री दिल के मरीज हैं और उनका बेटा भी हिरासत में है. लिहाजा उन्हें उनकी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर रियायत दिया जाए.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने सुनवाई के बाद इस याचिका को खारिज कर दिया और तेलंगाना उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा.
नागेश्वर राव के वकील ने कहा कि उनका इससे कोई लेना-देना नहीं था क्योंकि कथित ठेके दिए जाने के लगभग 2 साल बाद वेंकट नागेश्वर राव को आबकारी विभाग का मंत्री बनाया गया था. वहीं, इस पर जवाब देते हुए सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस पूरे मामले में आपका बेटा, बहू और परिवार के अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं. यह 300 करोड़ रुपये का शराब नीति घोटाला का मामला है.
यह मामला 2020 से 2024 के बीच आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (एपीएसबीसीएल) की शराब परिवहन निविदा प्रक्रिया में कथित हेरफेर से संबंधित है