मार्कफेड FRK टेंडर में अनियमितता, कांग्रेस नेता कन्हैया अग्रवाल का आरोप: 80% स्थानीय उद्योग खतरे में

रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने मार्कफेड द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए जारी फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल और मार्कफेड के प्रबंध संचालक जितेंद्र शुक्ला को ज्ञापन भेजकर नई, पारदर्शी और व्यावहारिक शर्तों के साथ टेंडर जारी करने का आग्रह किया है।

कन्हैया अग्रवाल का आरोप है कि टेंडर की नई शर्तों के कारण लगभग 80% स्थानीय FRK प्लांट बाहर हो गए हैं और केवल कुछ बड़े मिलर्स को फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह स्थानीय उद्यमियों के हितों के खिलाफ है और छत्तीसगढ़ भंडार क्रय अधिनियम का उल्लंघन भी है। टेंडर में बदलाव करने के बाद कम से कम 15 दिन का अतिरिक्त समय देना आवश्यक था, जो नहीं दिया गया।

महामंत्री ने चेतावनी दी कि स्थानीय प्लांटों को बाहर रखने से FRK की आपूर्ति बाधित होगी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, राज्य को लगभग 200 करोड़ रुपये का राजस्व हानि का खतरा है।

कन्हैया अग्रवाल ने भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया और कहा कि पिछले टेंडर में FRK की खरीदी 39 रुपये प्रति किलो थी, जबकि वर्तमान टेंडर में कीमत बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो से अधिक कर दी गई है। उनका कहना है कि इससे शासन को 175-200 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान होगा और कुछ चुनिंदा लोग लाभान्वित होंगे।

उन्होंने कहा कि यदि टेंडर प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो स्थानीय मिलर्स के हितों की रक्षा के लिए न्यायालय की शरण ली जाएगी और टेंडर पर रोक लगाने की मांग की जाएगी।

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