न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में अब प्राइवेट खिलाड़ियों की एंट्री, विपक्ष के विरोध के बीच लोकसभा से SHANTI बिल पास…

आने वाले समय में भारत की ऊर्जा दुनिया में एक ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिलने वाला है।

ऐसा इसलिए क्यों कि बुधवार को लोकसभा में ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल’ पारित हो गया।

दरअसल, इस कानून के बनने से देश में परमाणु एनर्जी सेक्टर में प्राइवेट प्लेयर्स की भागीदारी का रास्ता खुलने का रास्ता साफ हो जाएगा।

माना जा रहा है कि इस नए कानून के बनने के बाद से 63 साल पुराने राज्य एकाधिकार को तोड़ते हुए प्राइवेट कंपनियों को परमाणु ऊर्जा उत्पादन में हिस्सेदारी मिलेगी।

केंद्र सरकार ने गिनाए नए कानून के फायदे

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह कानून भारत को साल 2027 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इस बिल पर चर्चा के दौरान जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह कानून मील का पत्थर साबित होगा।

उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक भूमिका तेजी से बढ़ रही है और यदि देश को एक प्रभावी वैश्विक शक्ति बनाने है, तो उसको अंतरराष्ट्रीय मानकों और रणनीतियों के अनुरूप आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने आगे कहा कि पूरी दुनिया स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है और भारत ने भी इसी दिशा में साल 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।

क्या है इस नए बिल का उद्देश्य?

उल्लेखनीय है कि इस बिल का मुख्य उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना है।

बता दें कि अभी तक ये क्षेत्र मुख्य रूप से सरकारी नियंत्रण में रहा था, लेकिन अब नए कानून के तहत इस क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा सकेगी। केंद्र सरकार का तर्क है कि इससे तकनीक नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध

हालांकि, बिल के लोकसभा में पेश होने के बाद विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया। विपक्ष के सांसदों को दावा है कि यह कानून न्यूक्लियर डैमेज के लिए सिविल दायित्व अधिनियम, 2010 के प्रावधानों को कमजोर कर रहा है।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि मौजूदा कानून के तहत के तहत किसी भी परमाणु दुर्घटना की स्थिति में उपरकण आपूर्तिकर्ताओं पर जिम्मेदारी तय की जाती है, लेकिन सरकार की ओर से पेश किए गए नए बिल में यह जिम्मेदारी कमजोर हो सकती है।

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