बंगाल में चुनाव आयोग ने करीब 30 लाख मतदाताओं का संदिग्ध डेटा पहचाना, हटाने की प्रक्रिया अब शुरू होगी…

बंगाल में चुनाव आयोग ने प्रोजेनी मैपिंग के माध्यम से लगभग 30 लाख मतदाताओं के संदिग्ध डाटा की पहचान की है।

ये मतदाता 2002 की मतदाता सूची में नहीं थे और उन्होंने अपने माता-पिता के नाम के आधार पर पंजीकरण के लिए आवेदन किया था।

डाटा में मिल रहा काफी अंतर

संदिग्ध डाटा मुख्यरूप से 2002 की सूची में माता-पिता के नाम, आयु या तस्वीरों के बेमेल होने से संबंधित है, खासकर मृत माता-पिता के मामलों में।

प्रोजेनी मैपिंग यह पता लगाने के लिए की जाती है कि मौजूदा मतदाता सूची में संबंधित मतदाता के माता-पिता के नाम 2002 की सूची से मेल खाते हैं या नहीं।

बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) कार्यालय सूत्रों ने बताया कि ज्यादातर मामलों में 2002 की मतदाता सूची में माता-पिता के नाम और 27 अक्टूबर, 2025 की मौजूदा मतदाता के नाम में अंतर होने की बात सामने आई है।

माता-पिता की उम्र में अंतर के मामले सामने आए हैं

दोनों सूची में माता-पिता की उम्र में अंतर होने के भी मामले सामने आए हैं। साथ ही गणना प्रपत्र में छपी माता-पिता की तस्वीरों और सूची में मतदाता द्वारा दी गई नई तस्वीरों में अंतर था।

ज्यादातर मामलों में, ऐसा अंतर मरे हुए माता-पिता के साथ हुआ है।कचरे के ढेर से मतदाता पहचान पत्रों से भरा बोरा मिलाबंगाल के नदिया जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 12 के पास बुधवार को कचरे के ढेर पर एक बोरा पड़ा मिला, जिसमें मतदाता फोटो पहचान-पत्र भरे हुए थे।

मामले की जांच जारी है

स्थानीय निवासियों ने शांतिपुर में कचरा स्थल के पास पड़े पहचान-पत्र वाले बोरे को देखा और पुलिस को सूचित किया। पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और बोरा सत्यापन के लिए थाने ले गई। मामले की जांच जारी है।

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