कागजों पर बैन, बाजार में खुलेआम बिक रहा जानलेवा चाइनीज मांझा! गर्दन कटने से बाइक सवार छात्र की मौत; दो अन्य घायल…

प्रतिबंधित चाइनीज मांझे ने रविवार सुबह आठवीं के छात्र की जान ले ली। घटना कनाड़िया थाना अंतर्गत बायपास की है। ओमेक्स सिटी-2 निवासी 16 वर्षीय गुलशन पुत्र रामकिशन की मौत हुई है।

टीआइ देवेंद्र मरकाम के अनुसार आठवीं का छात्र गुलशन दोस्त अरुण, नंदू और कृष्णा के साथ रालामंडल घूमने गया था। बाइक गुलशन चला रहा था।

चारों सहारा सिटी के सामने पहुंचे ही थे कि धारदार डोर गुलशन की गर्दन में फंस गई। उसने बाइक रोकी मगर डोर ने आधी गर्दन चीर डाली।

ज्यादा खून बहने से गुलशन की मौत

पीछे बैठे अरुण और कृष्णा ने डोर को पकड़ने का प्रयास किया तो उनकी अंगुलियां भी कट गईं। गुलशन की गर्दन से खून का फव्वारा निकला और वह बेहोश गया।

परिवार सहित जा रहा कार चालक गुलशन को नजदीकी अस्पताल ले गया, लेकिन स्थिति देख वहां से एमवाय अस्पताल रवाना कर दिया।

ज्यादा खून बहने से गुलशन की मौत हो गई। रिश्तेदार सतीश जाटवा के अनुसार मूलत: ठीकरी निवासी गुलशन मांगलिया स्थित ओमेक्स-2 कॉलोनी में रहता था।

उसके पिता मजदूरी करते हैं। गुलशन पढ़ाई के साथ काम करने लगा था। रविवार होने से अरुण, कृष्णा और नंदू के साथ रालामंडल घूमने गया था।

बिजली के खंभे और झाड़ियों में उलझी चाइनीज डोर

कलेक्टर शिवम वर्मा ने 25 नवंबर को ही चाइनीज डोर बेचने-खरीदने पर रोक लगाई थी। घटना के बाद एसीपी रवींद्र बिलवाल और तेजाजी नगर टीआइ देवेंद्र मरकाम अरुण को लेकर मौके पर पहुंचे।

वहां पुलिस को लाल रंग का चाइनीज मांझा मिला। लोगों ने बताया कि बायपास की टाउनशिप और ऊंची इमारतों से लोग पतंग उड़ाते हैं।

चाइनीज मांझा बिजली के खंभे और झाड़ियों में अटका हुआ था। पुलिस के अनुसार पतंग नहीं मिली है। हो सकता है डोर टूट कर आई हो और गुलशन उसकी चपेट में आ गया।

एनजीटी के प्रतिबंध के बावजूद सिंथेटिक, शीशा-कोटेड मांझे की खुलेआम बिक्री

चायनीज मांझे पर प्रतिबंध को सालों बीत गए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जानलेवा डोर खुलेआम बेची जा रही है।

कांच और केमिकल से बना यह सिंथेटिक मांझा हर मकर संक्रांति से पहले गुपचुप बाजार में लौट आता है और हादसों की लंबी फेहरिस्त तैयार हो जाती है।

बैन के बावजूद दुकानों और आनलाइन प्लेटफॉर्म पर इसकी उपलब्धता प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़ा कर रही है। चायनीज मांझा आम मांझे से अलग होता है, क्योंकि इसे शीशा-पाउडर से कोट करके धारदार बनाया जाता है।

इसमें नायलान, सिंथेटिक फाइबर या प्लास्टिक बेस होता है। इससे यह बेहद धारदार बन जाता है और गर्दन, चेहरे और हाथों की त्वचा आसानी से काट देता है।

सिर्फ कागजों पर बैन, बाजार में अब भी बिक रही ‘मौत की डोर’

कई मामलों में इससे गर्दन की नसें तक कट गई हैं। इंसानों के साथ यह पक्षियों के लिए भी जानलेवा है। चूंकि यह धातु कोटिंग वाली सिंथेटिक डोर होती है, बिजली के तारों में फंसने पर करंट फैलने का खतरा होता है।

चायनीज मांझे पर पहली बड़ी कानूनी कार्रवाई 2017 में हुई थी, जब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने इसे खतरनाक बताया और इसके उत्पादन, बिक्री, भंडारण, परिवहन और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया।

इसके बावजूद कई राज्यों में यह मांझा अभी भी अवैध रूप से बिक रहा है। 2024 में इंदौर में ही दो दुकानों से चायनीज मांझे के 89 बंडल जब्त किए गए थे। पुलिस प्रशासन समय-समय पर रेड करता है और बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करता है। फिर भी हादसे हो रहे हैं।

किन धाराओं के तहत कार्रवाई होती है?

  • सेक्शन 188: सरकारी आदेश की अवहेलना।
  • सेक्शन 269: जीवन को खतरे में डालने वाला लापरवाही भरा कार्य।
  • सेक्शन 308: गैर इरादतन हत्या का प्रयास।
  • सेक्शन 304ए: लापरवाही से मौत।
  • सेक्शन 337: साधारण चोट पहुंचाना।
  • सेक्शन 338: गंभीर चोट पहुंचाना।

इंदौर में पूर्व में सामने आए प्रकरण

  • 15 जनवरी 2025: बाइक चलाते समय चाइनीज मांझा गर्दन में फंसने से 20 वर्षीय हिमांशु सोलंकी की मौत।
  • चार जनवरी 2025: चाइनीज मांझे के कारण 20 वर्षीय आकाश की गर्दन कटी। गंभीर अवस्था में भर्ती करना पड़ा। 15 टांके लगे।
  • 26 दिसंबर 2024: दोस्त के साथ बाइक पर जाते समय विनोद अग्रवाल (38) की गर्दन में चायनीज मांझा फंसा। अस्पताल ले जाना पड़ा।
  • 21 दिसंबर 2024: पति के साथ बाइक पर जा रही रीना की गर्दन में चायनीज मांझा फंस गया। खून बहने लगा। टांके लगाए गए। लंबे समय तक खाने में परेशानी रही।

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