अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं तो आपने भी कई बार यह सोचा होगा कि ‘मेरा कोच आखिर प्लेटफॉर्म पर कहां लगेगा?’ अक्सर जल्दी-जल्दी में यात्री गलत जगह खड़े हो जाते हैं और ट्रेन रुकने पर इधर-उधर भागते नजर आते हैं.
भारतीय रेलवे में हर ट्रेन की कोच पोजीशन एक जैसी नहीं होती. लेकिन एक सामान्य पैटर्न जरूर होता है. जिसे समझकर आप अपनी यात्रा को आरामदायक बना सकते हैं.
चलिए जानते हैं, जनरल से लेकर फर्स्ट एसी तक, ट्रेन के हर डिब्बे की पोजीशन कहां रहती है.
ट्रेन के डिब्बों की बेसिक बनावट
भारतीय रेलवे में किसी ट्रेन का स्ट्रक्चर इंजन के डायरेक्शन पर निर्भर करती है. अगर इंजन आगे है तो कोचों की स्थिति एक क्रम में होती है, और अगर पीछे है तो वही क्रम उल्टा हो जाता है.
हालांकि ज्यादातर ट्रेनों में डिब्बे इस तय क्रम में लगाए जाते हैं.
सबसे आगे या पीछे होता है जनरल कोच
जनरल डिब्बा (GS) आमतौर पर ट्रेन के सबसे आगे या सबसे पीछे होता है. ताकि यात्रियों को जल्दी चढ़ने और उतरने की सुविधा मिले. इसके साथ ही SLR यानी गार्ड और लगेज वैन भी इसी हिस्से में लगी होती है.
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बीच के हिस्से में स्लीपर और एसी कोच
जनरल के बाद आमतौर पर स्लीपर क्लास (SL) के डिब्बे होते हैं. स्लीपर के बाद थर्ड एसी (3A), सेकंड एसी (2A) और सबसे आगे फर्स्ट एसी (1A) लगाया जाता है.
अगर ट्रेन में पेंट्री कार है. तो वो अक्सर बीच में रहती है. ताकि पूरे ट्रेन में खाना आसानी से पहुंच सके.