‘गाजा में अल जजीरा के पत्रकारों ने आतंकवादियों का काम किया’: इजरायली सेना का दावा, प्रस्तुत किए गए सबूत…

एक चौंकाने वाला दावा करते हुए इजरायल की सेना, IDF ने उन खुफिया डॉक्यूमेंट को सार्वजनिक कर दिया है.

इसमें आरोप लगाया गया है कि गाजा में काम करने वाले अल जजीरा के कई पत्रकार सीधे तौर पर हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (PIJ) से जुड़े थे. IDF का दावा है कि इन डॉक्यूमेंट में पत्रकारों के रिकॉर्ड, उनको दी जाने वाली ट्रेनिंग कोर्स की लिस्ट, फोन डिक्शनरी और उन्हें मिलने वाली सैलरी के डॉक्यूमेंट शामिल हैं.

इनके आधार पर IDF ने दावा किया है कि ये पत्रकार न केवल गाजा संघर्ष को कवर कर रहे थे बल्कि सक्रिय रूप से इसमें भाग ले रहे थे.

डिक्लासिफाई यान सार्वजनिक किए गए खुफिया फाइलों के अनुसार, अल जजीरा के कई पत्रकारों ने दोहरे ऑपरेटिव्स के रूप में काम किया, जिससे पत्रकारिता और आतंकवाद के बीच की रेखा धुंधली हो गई.

IDF का दावा है कि इन व्यक्तियों ने हमास और PIJ के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने के लिए पत्रकार के रूप में अपनी साख का इस्तेमाल किया, उनके अत्याचारों और विफलताओं को छिपाते हुए आतंकवादी समूहों के पक्ष में मीडिया कवरेज को आकार दिया.

IDF का दावा है कि ऐसे पत्रकारों में इस्माइल अल-गौल भी शामिल है, जिसकी पहचान हमास नुखबा ऑपरेटिव के रूप में की गई है. इजरायली सेना का आरोप है कि इस्माइल ने अल जजीरा रिपोर्टर के रूप में काम करते हुए इजरायल पर हुए 7 अक्टूबर के हमलों में भाग लिया था.

एक अन्य पत्रकार जिसका नाम इजरायली सेना ने लिया है, वो इस्माइल अबू उमर है जो कथित तौर पर हमास की खान यूनिस बटालियन में डिप्टी कंपनी कमांडर के रूप में काम करता था.

आरोप लगाया गया है कि उसने नरसंहार के दौरान किबुतज निर ओज के अंदर खुद को फिल्माया भी था. इसी तरह कहा गया है कि हमास स्नाइपर के रूप में काम करने वाले होसाम शबात ने एक पत्रकार के रूप में अपनी भूमिका का इस्तेमाल इजरायली बलों और नागरिकों पर हमले करने के लिए किया.

गंभीर है यह आरोप

इजरायल ने इन डॉक्यूमेंट को जारी करके यह दावा किया है कि हमास न केवल अल जजीरा के पत्रकारों का आतंकवादी के रूप में इस्तेमाल कर रहा था बल्कि खबर क्या चलेगी, इसपर भी सहयोग हो रहा था. IDF का दावा है कि 2022 और 2023 की खुफिया जानकारी से संकेत मिलता है कि हमास ने अल जजीरा के पत्रकारों को घटनाओं को कवर करने के बारे में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं.

इसमें एक असफल इस्लामिक जिहाद रॉकेट के लॉन्च की घटना की कवरेज भी शामिल है, जिससे जबालिया में नागरिकों की मौत हो गई थी.

आरोप है कि हमास ने पत्रकारों को ऐसी आलोचनात्मक भाषा से बचने का निर्देश दिया था जो समूह की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है. एक अन्य डॉक्यूमेंट में अल-जजीरा और हमास नेतृत्व के बीच खुफिया बातचीत के लिए एक सुरक्षित “अल जज़ीरा फोन” लाइन बनाने का वर्णन किया गया है.

पहली बार विवादों में नहीं अल जजीरा

अल जजीरा के लिए यह पहली बार नहीं है जब वह विवादों में आया है. इससे पहले इस साल मई में, भारत के ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान, अल-जजीरा के पाकिस्तान संवाददाता कमल हैदर ने पाकिस्तानी सेना में अपने सूत्रों का हवाला देते हुए झूठा दावा किया था कि भारतीय वायु सेना की पायलट स्क्वाड्रन लीडर शिवानी सिंह को पाकिस्तानी सेना ने कथित तौर पर उस समय हिरासत में ले लिया था, जब पाकिस्तानी सेना ने कथित तौर पर राफेल लड़ाकू विमान को मार गिराया था.

बाद में पाकिस्तानी सेना के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक ने इस खबर को खारिज कर दिया था. 

इजरायली सेना के इन ताजा खुलासों ने अल जजीरा की मंशा पर बहस फिर से शुरू कर दी है. इसने आतंकी प्रोपेगेंड को बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया के गलत इस्तेमाल के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं. खबर लिखे जाने तक अल जजीरा ने इजरायली सेना के दावों पर विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की थी.

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