देश के लोकपाल कार्यालय की ओर से 7 बीएमडब्ल्यू कारों की खरीद के लिए निकाले गए विज्ञापन पर अब भी विवाद जारी है।
इस मामले में अब पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुदुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी का भी बयान सामने आया है।
उन्होंने लोकपाल की ओर से इन कारों की खरीद की आलोचना करते हुए कहा है कि संस्था अपना 10 फीसदी बजट तो कारों पर ही खर्च करने वाली है।
उन्होंने कहा कि इन कारों को खरीदने पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं 2025-26 के लिए लोकपाल का कुल बजट ही 44.32 करोड़ रुपये है। यही नहीं 2023-24 में लोकपाल के लिए तय बजट में 12 लाख रुपये मोटर वाहन के मद में तय हुए थे।
तब लोकपाल ने कोई खर्च नहीं किया और मोटर वाहन में व्यय जीरो दिखाया गया था। इससे पहले भी लोकपाल की ओर से कोई खर्च नहीं हुआ था। लेकिन जब BMW कारों की खरीद के लिए विज्ञापन जारी हुआ तो विवाद मच गया।
16 अक्तूबर को जारी विज्ञापन को लेकर फिलहाल बवाल मचा है। किरण बेदी ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा कि लोकपाल ऐसे फैसले से बच सकता था।
अन्ना हजारे ने 2013 में आंदोलन किया था और लोकपाल की मांग की थी। उसके बाद ही लोकपाल अधिनियम आया था और फिर इस संस्था का गठन हुआ।
किरण बेदी ने तो यह भी कहा कि लोकपाल तो स्वदेशी कारें खरीदनी चाहिए। जब पीएम मोदी स्वदेशी का प्रचार करते हैं तो फिर लोकपाल को विदेशी गाड़ियां लेने की क्या जरूरत है।
क्या भारत में अच्छी कारें नहीं बनती हैं? लोकपाल का फैसला तो स्वदेशी मिशन के एकदम खिलाफ है। यही नहीं उन्होंने कहा कि लोकपाल जिस मकसद के लिए बना था, वह काम ही नहीं किया।
उन्होंने कहा कि लोकपाल को तो स्वदेशी इलेक्ट्रिक कारें खरीदनी चाहिए। वहीं कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने भी तंज कसा है।
उन्होंने कहा कि पहली बार 1960 में लोकपाल की बात हुई थी। क्या यह विचार इसलिए आया था कि लोकपाल BMW कारें खरीदेंगे।
सवाल उठा- लोकपाल ने सिर्फ 24 केसों में जांच की और 6 में केस
उन्होंने एक और बात कही कि लोकपाल के पास कुल 8,703 शिकायतें मौजूद हैं। इनमें से सिर्फ 24 मामलों में ही जांच हुई और 6 में मुकदमा चलाने की मंजूरी मिली है।
अब ये लोग BMW कारें खरीद रहे हैं और एक कीमत 70 लाख रुपये है। यदि ऐसे ही ऐंटी-करप्शन संस्था काम करेगी तो फिर क्या होगा।
इस मामले पर पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने कहा कि लोकपाल के लिए इतनी महंगी कारें खरीदना सही नहीं है।
मंत्र यह होना चाहिए- सादी जिंदगी और ऊंचा सफलता। लोकपाल का तो यही उद्देश्य होना चाहिए। अब सवाल यह है कि लोकपाल का परफॉर्मेंस क्या रहा है।