देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की अगले सप्ताह यानी 31 अक्टूबर को 150वीं जयंती है।
केंद्र सरकार ने इस मौके पर मेगा इवेंट का आयोजन करने का फैसला किया है।
इस कड़ी में उनके जीवन पर आधारित 90 मिनट के एक नाटक का मंचन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के कलाकारों द्वारा पहले 30 और 31 अक्टूबर को गुजरात के केवड़िया में किया जाएगा।
इसके बाद इस नाटक का मंचन नई दिल्ली और अहमदाबाद सहित देश भर के अन्य शहरों में किया जाएगा।
केवड़िया में होने वाले भव्य समारोह का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस कार्यक्रम में उनके अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केंद्र तथा गुजरात के कई मंत्री और नेता शामिल होंगे।
गुजरात सरदार पटेल का गृह राज्य है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 90 मिनट का यह नाटक सरदार पटेल की सालभर चलने वाली 150वीं जयंती समारोह का हिस्सा है, जिसका समापन 31 अक्टूबर, 2026 को होगा।
PM मोदी की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति
संस्कृति मंत्रालय ने हाल ही में सरदार पटेल की याद में होने वाले इस मेगा इवेंट की देखरेख के लिए प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन की अधिसूचना जारी की थी। इस समिति में केंद्रीय मंत्रियों, राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों समेत 100 से अधिक सदस्य हैं। समिति में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और रामनाथ कोविंद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा भी प्रमुख सदस्य हैं।
नाटक में 200 कलाकार और क्रू मेंबर
कार्यक्रम की जानकारी रखने वालों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि इस नाटक में 200 कलाकार और क्रू मेंबर होंगे। नाटक में लाइटिंग इफेक्ट और अन्य नई तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। तीन अलग-अलग कलाकार नायक यानी सरदार पटेल की भूमिका निभाएंगे। इसकी शुरुआत 14 वर्षीय पटेल से होगी, जिन्होंने स्कूल में किताबों की वास्तविक कीमत 2 पैसे के बजाय 5 पैसे में बेचे जाने पर विद्रोह किया था।
पटेल के जीवन से जुड़े कुछ गंभीर मुद्दों का मंचन
सूत्रों के हवाले से कहा गया है नाटक में सरदार पटेल के जीवन से जुड़े कुछ गंभीर मुद्दों को भी उठाया गया है। उनमें राजनीति में परिवारवाद का विरोध भी शामिल है। दरअसल, सरदार पटेल ने अपने परिवार के सदस्यों, खासकर अपने बच्चों को राजनीति में शामिल न होने की सख्त हिदायत दी थी, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि वे उनके नाम का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करें। इस अवधारणा से जुड़े एक सूत्र ने कहा, “आज के समय में भाई-भतीजावाद पर बहुत चर्चा हो रही है; पटेल का जीवन व्यक्तिगत योग्यता के महत्व को दर्शाता है।”
अभी चल रहा नाटक का अभ्यास
फिलहाल, इस मेगा इवेंट का अभ्यास चल रहा है। नाटक में सरदार पटेल की लंदन से कानून की पढ़ाई करने के बाद बैरिस्टर के रूप में अहमदाबाद वापसी और 1916 में बाल गंगाधर तिलक के एक भाषण ने पटेल की राजनीतिक चेतना में कैसे महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया, यह भी दिखाया जाएगा। नाटक में महात्मा गांधी के साथ उनके संबंधों पर भी प्रकाश डाला जाएगा; कैसे 1946 में, स्वतंत्रता से ठीक पहले, जब गांधी ने जवाहरलाल नेहरू के पक्ष में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए कहा, तो पटेल पीछे नहीं हटे। इसके बाद नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने, जबकि पटेल उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने। नाटक का समापन उनके अंतिम दिनों और महीनों के साथ होगा। इसमें यह भी दिखाया जाएगा कि 1948 में गांधीजी की हत्या ने उन्हें कितना झकझोर दिया था।