Diwali Special Toran: इन 3 पत्तों वाले तोरण से घर में आएगी लक्ष्मी, बढ़ेगी समृद्धि और बरकत…

प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131

20 अक्टूबर यानी कल पूरे देश भर में दीवाली मनाई जाएगी।

सनातन धर्म में दीवाली का महत्व बहुत ज्यादा है। जब भगवान श्रीराम 14 साल के वनवास के बाद अपनी अयोध्या नगरी पहुंचे थे, तब वहां के लोगों ने घी के दीपक जलाकर उनका स्वागत किया था।

इस दौरान भगवान श्रीराम के साथ मां सीता और भाई लक्ष्मण भी थे। इस खुशी में हर साल कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष वाली अमावस्या तिथि पर दीवाली मनाई जाती है।

दीवाली पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं। इसके बाद दीए और झालरों की मदद से घर को सजाते हैं। इस दौरान घर के मुख्य द्वार पर तोरण लगाने का विशेष महत्व होता है।

बता दें कि दीवाली पर आप खास तीन पत्तों का तोरण लगा सकते हैं। नीचे जानें इनके बारे में…

पान के पत्तों का तोरण: दीवाली पर पान के पत्तों का तोरण लगाना बेहद ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि पान के पत्ते से घर में सुख-समृद्धि आती है।

घर के मुख्य द्वार पर पान के पत्तों वाला तोरण लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। इसकी मदद से घर की सारी बुरी ऊर्जा एक झटके में बाहर निकल जाती है।

ऐसा भी कहा जाता है कि देवी-देवता पान के पत्तों से प्रसन्न होते हैं। इसी वजह से पूजा-पाठ में पान के पत्तों का इस्तेमाल होता है।

अशोक के पत्तों का तोरण: दीवाली के दिन अशोक के पत्तों का तोरण लगाना भी अच्छा माना जाता है। इससे बने तोरण को मुख्य दरवाजे पर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती है।

इसकी मदद से घर का वातावरण भी शुद्ध होता है। साथ ही घर भी पवित्र हो जाता है। अशोक के पत्तों के तोरण से घर के मुख्य द्वार की सुंदरता भी बढ़ जाती है।

आम के पत्तों का तोरण: आम के पत्ते का तोरण दीवाली पर लगाना बेहद ही शुभ माना जाता है। आम के पत्तों का इस्तेमाल पूजा-पाठ में भी होता है।

इसके तोरण से घर की शुद्धता हो जाती है। साथ ही अगर इसमें गेंदे के फूल भी लगा दिए जाए तो घर की सुंदरता देखते ही बनती है।

आम के पत्तों में सकारात्मक ऊर्जा होती है और ऐसे में इससे बने हुए तोरण से घर में खुशहाली आती है। ज्यादातर लोग घर में आम के पत्तों का तोरण लगाते हैं।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए वास्तुशास्त्र क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

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