फैसले का गलत अनुवाद देख नाराज हुए जज, बोले– हर शब्द और अल्पविराम की होती है अहमियत…

सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में एक मामले का निपटारा करते समय निचली अदालत के फैसले का खराब अंग्रेजी अनुवाद देख जज साहब भड़क गए।

उच्चतम न्यायालय की पीठ ने फैसले के अनुवाद के तरीके पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कानून के मामलों में हर शब्द जरूरी होता है और हर शब्द, हर अल्पविराम मामले की समझ पर प्रभाव डालते हैं।

मामले की सुनवाई जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पीके मिश्रा की पीठ कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि फैसलों के अनुवाद में खास सावधानी बरती जानी चाहिए।

उच्चतम न्यायालय ने कहा, “दीवानी अदालत के फैसले का जिस तरह अंग्रेजी अनुवाद किया गया, उस पर हम असंतोष व्यक्त करते हैं।

कानून के मामलों में शब्दों का अत्यधिक महत्व होता है। हर शब्द, हर अल्पविराम का मामले की समझ पर प्रभाव पड़ता है।

यह सुनिश्चित करने के लिए उचित सावधानी बरतनी होगी कि मूल भाषा के शब्दों के सही अर्थ और भावना का अंग्रेजी में अनुवाद किया जाए ताकि अपीलीय अदालतें पहले घटित हुई घटना को सही तरीके से समझ सकें।”

क्या मामला?

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में ज़ोहरबी नाम की एक महिला द्वारा अपने मृतक पति, चांद खान की संपत्ति के संबंध में दायर एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी।

पूरा मामला चांद खान द्वारा छोड़ी गई संपत्तियों को लेकर पारिवारिक विवाद से उत्पन्न हुआ। दरअसल चांद खान की कोई संतान नहीं थी और कुछ समय पहले उनकी मृत्यु हो गई थी।

अदालत में खान की पत्नी जोहरबी ने संपत्ति के तीन-चौथाई हिस्से पर दावा करते हुए दलील दी थी कि यह मुस्लिम कानून के तहत ‘मतरूक’ संपत्ति है।

वहीं चांद खान के भाई इमाम खान ने इस दावे का विरोध करते हुए दलील दी कि संपत्तियां चांद खान के जीवनकाल में ही बिक्री समझौतों के माध्यम से तीसरे पक्ष को हस्तांतरित कर दी गई थीं।

इस पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि किसी संपत्ति को बेचने का समझौता मालिकाना हक का हस्तांतरण नहीं करता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि मृतक की सभी संपत्तियां पैतृक संपत्ति का हिस्सा हैं और इन्हें मुस्लिम कानून के अनुसार ही बांटा जाना चाहिए।

कोर्ट ने मुस्लिम लॉ का दिया हवाला

कोर्ट ने माना कि चूंकि बिक्री विलेख चांद खान की मृत्यु के बाद ही निष्पादित किए गए थे, इसलिए संपत्ति उनके निधन के समय भी उनके पास ही रही और इसलिए इसे ‘मतरूक’ संपत्ति माना जाना चाहिए।

जस्टिस करोल ने अपने फैसले में लिखा, ‘‘बेची जाने वाली संपत्ति, उस समय भी चांद खान की संपत्ति थी और इसलिए लागू कानून के अनुसार संपत्ति बंटवारे के अधीन होगी।’’

कोर्ट में परिभाषाओं का हवाला देते हुए कहा कि ‘मतरूक’ शब्द अरबी भाषा से लिया गया है और इसका अर्थ है ‘‘मृत व्यक्ति द्वारा छोड़ी गई संपत्ति’’ और यह मुस्लिम उत्तराधिकार कानून के अनुसार हस्तांतरण के अधीन है।

पीठ ने कहा कि मुस्लिम कानून के तहत, अगर मृतक की कोई संतान नहीं है, तो पत्नी एक-चौथाई अथवा आठवें हिस्से की हिस्से की हकदार है।

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