कौन थे अब्राहम, जिनका नाम डोनाल्ड ट्रंप ने फिर लिया; मुसलमान, यहूदी और ईसाई सभी करते हैं उन्हें सम्मान…

गाजा पीस समिट के लिए मध्य एशिया की यात्रा पर पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार 2020 के उस ‘अब्राहम समझौते’ का जिक्र किया जो कि इजरायल और यूएई, बहरीन, सुडान और मोरक्को के बीच किया गया था।

इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच विवाद को डोनाल्ड ट्रंप उनकी जड़ों को याद दिलाकर खत्म करवाना चाहते हैं। अब सवाल है कि आखिर अब्राहम कौन हैं, जिनका सम्मान यहूदी, ईसाई और मुसलमान तीनों करते हैं। दरअसल इन तीनों धर्मों की जड़ें एक ही जगह से हैं। इन तीनों ही धर्मों को इब्राहीमी धर्म कहा जाता है।

यहूदियों की हिब्रू बाइबल, ईसाइयों की बाइबल और मुसलमानों की कुरआन में स्पष्ट लिखा है कि वे सभी अब्राहम के ही ईश्वर पर विश्वास करते हैं। आम तौर पर मुसलमान अब्राहम को इब्राहिम कहते हैं।

अब्राहम को परमात्मा का दूत बताया गया है। ‘अब्राहम- अ जर्नी टु द हार्ट ऑफ थ्री फेथ्स’ में ब्रूस फेलर ने लिखा है कि सभी अब्राहम पर दावा करते हैं लेकिन सच यह है कि वह सबके हैं।

वह कहते हैं कि कि कितनी विडंबना है कि तीनों ही धर्म अब्राहम को अपना कहते हैं और इसके बावजूद वे लड़ते हैं।

हिब्रू बाइबल में क्या गया गया है

हिब्रू बाइबल में बताया या है कि अब्राहम से ईश्वर ने ही वादा किया था कि वह एक महान राष्ट्र के पिता होंगे। वहीं अब्राहम की कोई संतान नहीं थी।

कहा जाता है कि ईश्वर ने अब्राहम को एक एक ऐसे भूखंड की यात्रा पर भेज दिया जहां आज इजरायल, जॉर्डन और गाजा है। अब्राहम की एक सेविका हागार से इश्माएल का जन्म हुआ।

वहीं एक चमत्कार हुआ और बुजुर्ग हो चुकीं उनकी पत्नी सारा से इसहाक का जन्म हुआ। बाद में हागार और इश्माइल को निर्वासित कर दिया गया था।

हालांकि अब्राहम के निधन के बाद वह अपने पिता के अंतिम दर्शन करने इसहाक के पास आए थे।

हिब्रू बाइबल और ईसाइयों के ओल्ड टेस्टामेंट की पुस्तक जेनेसिस में अब्राहम के जीवन के बारे में जानकारी मिलती है। इसमें बताया गया है कि ईसा से करीब 2000 साल पहले अब्राहम मेसोपोटामिया और हारान के आसपास रहते थे।

इसके बाद उन्होंने कनान की यात्रा की। ईश्वर ने वादा किया था कि उनकी संतानें एक बड़े राष्ट्र को जन्म देंगी।

कहां से हुआ यहूदियों का जन्म

इसहाक के बेटे यानी अब्राहम के पोते जैकब से ही यहूदियों की शुरुआत मानी जाती है। कहा जाता है कि जैकब के बेटों ने ही यहूदियों के लिए कनान में देश बनाया था।

बाइबल में क्या कहा गया है

बाइबल में भी बताया गया है कि ईसा मसीह अब्राहम के ही वंशज थे। वहीं माना जाता है कि मुस्लिमों के सबसे प्रमुख पैगंबर मोहम्मद साहब अब्राहम के बेटे इश्माएल के वंशज थे।

इस तरह से तीनों ही धर्म अपनी उत्पत्ति अब्राहम से बताते हैं और उन्हें ईश्वर का पहला दूत मानते हैं। तीनों ही धर्म अब्राहम को अपना पुरखा मानते हैं।

मुस्लिमों का मानना है कि उनकी शुरुआत आदम से हुई थी और उनके आखिरी पैगंबर मोहम्मद साहब थे।

यरूशलम को लेकर क्यों है विवाद?

यरूशलम पर भी तीनों ही धर्म दावा करते हैं। ईसाइयों का मानना है कि यही वह स्थान है जहां ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था और फिर तीसरे दिन वह वापस आए थे।

इसे हिल ऑफ द केलवेरी कहा जाता है। यहां सेपल्कर के भीतर ईसा मसीह का मकबरा भी बनाया गया है। वहीं मुस्लिमों की मस्जिद अल अक्सा यहां मौजूद है और यहीं पर डोम ऑफ द रॉक है।

मुसलमानों का कहना है कि पैगंबर मोहम्मद ने एक रात में ही मक्का से यहां तक की यात्रा की थी। वहीं डोम ऑफ रॉक का महत्व इसलिए है क्योंकि कहा जाता है कि यहीं से पैगंबर मोहम्मद ने जन्नत का सफर किया।

यहूदियों का कहना है कि उनका पवित्र मंदिर यहीं पर था। उनका मानना है कि पैगंबर अब्राहम ने यहीं पर अपने बेटे इश्हाक को बलि चढ़ाने की तैयारी की थी। यहां पर यहूदियों का कोटेय या पश्चिमी दीवार स्थित है जहां उनका आराधना स्थल है।

1948 में इजरायल का जन्म हुआ और 1967 में इजरायल ने पूर्वी यरूशलम में भी अपना कब्जा जमा लिया। इजरायली यरुशलम को अपनी अविभाजित राजधानी मानते हैं।

वहीं फिलिस्तीनी पूर्वी यरूशलम को राजधानी मानते हैं। यह विवाद लंबे समय से चला आ रहा है।

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