हमास ने इजरायल के 7 बंधकों को रिहा किया है और उनके पहुंचते ही यहूदी देश में जश्न का माहौल है। तेल अवीव की सड़कों पर लोग इजरायली झंडे लेकर उतरे हैं और अपने हमवतनों का स्वागत कर रहे हैं।
इन लोगों को हमास ने पूरे दो साल बाद रिहा किया है। 2023 में 8 अक्तूबर को किए गए हमले में हमास ने 1200 से ज्यादा लोगों का कत्ल कर दिया था और कुछ लोगों को अगवा कर लिया था।
इन लोगों में से कई तो मर चुके हैं। फिलहाल बताया जाता है कि 20 लोग हमास की कैद में हैं, जिनमें से 7 को पहली खेप में उसने सीजफायर डील के तहत रिहा किया है।
हमास की कैद से छूटने वाले लोगों में जिव बर्मन, मातन अंगरेस्ट, एलन हेल, ओमरी मिरान, एटान मोर शामिल हैं। फिलहाल यह जानकारी नहीं मिली है कि रिहा हुए लोगों की क्या स्थिति है।
उनकी तबीयत कैसी है या फिर अस्पताल में एडमिट कराने की जरूरत है या नहीं। इन लोगों की हमास की कैद से रिहाई को तेल अवीव पर लोगों ने बड़ी स्क्रीन्स पर देखा और जश्न मनाते नजर आए।
इन लोगों को हमास ने रेड क्रॉस सोसायटी को सौंपा। इनके बदले में इजरायल भी सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करने वाला है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि उनके दखल से यह सीजफायर डील हुई है। बता दें कि अब तक वह 8 जंगों को रुकवाने का क्रेडिट ले चुके हैं।
अहम बात यह है कि डोनाल्ड ट्रंप खुद इजरायल पहुंच चुके हैं। इस दौरान वह कई नेताओं के साथ गाजा शांति प्रस्ताव पर बात करेंगे।
इसके अलावा भुखमरी के शिकार गाजा के लिए मानवीय मदद बढ़ाने का भी प्रस्ताव है, जहां लाखों लोग फिलहाल बेघर हैं और खाने-पीने की चीजों की भी किल्लत है।
फिलहाल सवाल यह भी है कि बंधकों की रिहाई और सीजफायर लागू होने के बाद हमास का भविष्य क्या होगा।
क्यों बेंजामिन नेतन्याहू के लिए भी जरूरी यह सीजफायर
दरअसल इजरायल की यह मांग रही है कि हमास को गाजा से बाहर किया जाए, तभी सीजफायर रह पाएगा। दरअसल यह सीजफायर बेंजामिन नेतन्याहू के लिए भी जरूरी है क्योंकि बंधकों की रिहाई को लेकर वे भी घिरे रहे हैं।
बंधकों के परिजन सवाल उठाते रहे हैं कि अपने राजनीतिक फायदे की वजह से हमास के साथ किसी समझौते से नेतन्याहू बच रहे हैं। अब सीजफायर पर तो सहमति बन गई है, लेकिन नेतन्याहू चाहेंगे कि यह इजरायल की शर्तों पर ही लागू रहे।