अनुच्छेद 370 और 35ए को लेकर जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार ने बड़ा दावा कर दिया है।
उन्होंने PDP यानी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का नाम लिया और कहा कि भारतीय जनता पार्टी के साथ उनका गठबंधन इसकी वजह हो सकती है।
हालांकि, उन्होंने इसपर विस्तार से जानकारी नहीं दी। साल 2019 में भारत सरकार ने आर्टिकल 370 खत्म कर दिया था।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में नासिर असलम वानी ने कहा कि पीडीपी का पहले भाजपा के साथ गठबंधन करना इस क्षेत्र से अनुच्छेद 370 और 35ए होने की वजह है।
उन्होंने सरकार का रिपोर्ट कार्ड मांगने को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है।
साथ ही कहा है कि सिर्फ आलोचना करने से राज्य का दर्जा बहाल नहीं हो जाएगा और एक मुख्यमंत्री के पास केंद्र शासित क्षेत्र की सरकार से ज्यादा ताकत होती है।
उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार के मुख्यमंत्री के पास केंद्र शासित प्रदेश सरकार से ज्यादा ताकत होती है। इसके अलावा उमर अब्दुल्ला अपनी तरफ से जम्मू और कश्मीर के विकास के लिए सबकुछ कर रहे हैं…।
भाजपा के साथ पीडीपी का पहले हुआ गठबंधन ही शायद 370 और 35ए गंवाने की वज है…। विपक्ष सिर्फ एक साल में रिपोर्ट कार्ड मांग रहा है, उन्हें धैर्य रखना चाहिए। उन्होंने विपक्ष के तौर पर अच्छी भूमिका निभानी चाहिए…।
हमारी आलोचना करने से राज्य का दर्जा वापस नहीं मिलेगा।’
उन्होंने कहा, ‘…जहां तक राज्यसभा की सीटों की बात है, तो पार्टी ने कांग्रेस को एक सीट लेने के लिए कहा है…। वो निश्चित ही उम्मीदवार का नाम तय करने के लिए चर्चा कर रहे होंगे…।
4 सीटें गठबंधन के लिए रिजर्व हैं…। नेशनल कॉन्फ्रेंस का हमेशा विपक्ष ने विरोध किया है और इसमें कुछ भी नया नहीं है…।’ एनसी ने 10 अक्तूबर को राज्यसभा चुनाव के लिए 3 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है।
पार्टी ने चौधरी मोहम्मद रमजान, सज्जाद अहमद किचलू और शम्मी ओबेरॉय को मैदान में उतारा है। कहा जा रहा है कि चौथी सीट को लेकर फैसला जल्द हो सकता है।
कांग्रेस ने किया लड़ने से इनकार
जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हामिद कर्रा ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी केंद्र शासित प्रदेश में चार सीट के लिए 24 अक्टूबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी, क्योंकि गठबंधन सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने उन्हें ‘सुरक्षित सीट’ देने से इनकार कर दिया है।
पार्टी नेताओं की यहां मैराथन बैठक के बाद मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कर्रा ने कहा कि सर्वसम्मति से यह सहमति बनी है कि कांग्रेस राज्यसभा चुनाव नहीं लड़ेगी।
कर्रा ने कहा कि कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने राज्यसभा की दो सीट में से एक की मांग की थी, जिन पर अलग-अलग चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पार्टी को उन दो सीटों में से एक की पेशकश की, जिन पर एक ही अधिसूचना के तहत चुनाव होने जा रहे हैं।
कर्रा ने कहा, ‘इसे ध्यान में रखते हुए, बैठक में उपस्थित सभी प्रतिभागियों की राय थी कि सीट चार, सीट एक या दो की तरह सुरक्षित नहीं है। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि हम चौथी सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे।
हम यह निर्णय अपने गठबंधन सहयोगियों पर छोड़ेंगे कि वे इस बारे में क्या सोचते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘चूंकि हमें सुरक्षित सीट की पेशकश नहीं की गई, इसलिए हम चौथी सीट पर चुनाव नहीं लड़ना चाहते।’