यूपी में मिशन शक्ति का पांचवां चरण चल रहा है। एक दिन के लिए बालिकाओं को थाने का प्रभारी बनाया गया। पुलिस महिला अपराध के प्रति कितनी संवेदनशील है इसकी हकीकत सामने आई है।
आगरा में 13 साल की एक किशोरी से एक माह तक बंधक बनाकर दुराचार किया गया। पीड़िता अपनी मां के साथ ट्रांस यमुना थाने पहुंची।
तीन घंटे पुलिस ने उसे थाने में बैठाया। मामला फिरोजाबाद का बताकर पीड़िता को टहला दिया। जबकि घटना स्थल ट्रांस यमुना क्षेत्र का है।
फिरोजाबाद में नारखी थाना पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर जीरो क्राइम नंबर पर मुकदमा दर्ज किया है।
पीड़िता ने नारखी थाने में पुलिस को बताया कि चार साल पहले वह अपने तीन बच्चों के साथ पचोखरा निवासी राजकुमार के साथ आगरा चली गई थी।
राजकुमार ने राकेश नगर, श्याम विहार (ट्रांस यमुना) में किराए पर मकान लिया। वह अपने बच्चों के साथ उसके साथ रहने लगी। बड़ी बेटी की शादी कर दी। एक माह पहले उसका राजकुमार से झगड़ा हो गया। वह बेटे संग फिरोजाबाद आ गई।
13 वर्षीय बेटी राजकुमार के घर रह गई थी। छह अक्तूबर को वह बेटी से मिलने गई। बेटी उसे देखकर रोने लगी। उसकी हालत खराब थी। बेटी ने बताया कि राजकुमार ने लगातार एक माह तक उसके साथ गंदा काम किया।
उसे मारने की धमकी देता था। घर से बाहर नहीं निकलने देता था। बेटी की हालत खराब थी। वह बेटी को लेकर ट्रांस यमुना थाने गई। पुलिस को घटनाक्रम बताया। पुलिस ने तीन घंटे बैठाए रखा।
बाद में उससे कह दिया कि चार साल पहले नारखी थाना क्षेत्र से आगरा आई थी। केस वहीं थाने में लिखा जाएगा।
महिला गरीब है। उसकी कोई बड़ी सिफारिश नहीं थी। अधिकारियों को घटना की जानकारी नहीं थी। थाना पुलिस ने पीड़िता को टहला दिया। पीड़िता गुरुवार को फिरोजाबाद के नारखी थाने पहुंची।
पुलिस को घटना बताई। नारखी थाना पुलिस ने ट्रांस यमुना से संपर्क किया। आगरा पुलिस ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
आखिर सीमा विवाद क्यों आया
सवाल यह उठता है कि मां अपनी 13 वर्षीय बेटी को लेकर सबसे पहले ट्रांस यमुना थाने आई। थाना पुलिस ने उसकी बात पर तत्काल मुकदमा क्यों नहीं लिखा। इसे सीमा विवाद में क्यों उलझाया।
जबकि मुख्यमंत्री के निर्देश पर महिला सुरक्षा को मिशन शक्ति अभियान चल रहा है। थाना स्तर से जानकारी किस अधिकारी को दी गई। अपने स्तर से थाना पुलिस ने मुकदमा न लिखने का फैसला कैसे ले लिया।
एसओ बोले नारखी में गुमशुदगी है
एसओ ट्रांस यमुना रोहित कुमार से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि चार साल पहले महिला की नारखी थाने में गुमशुदगी दर्ज हुई थी। नारखी पुलिस आकर ही इस मामले की जांच करेगी।
उनके यहां की घटना नहीं है। वहीं नारखी पुलिस ने बताया कि महिला और उसके बच्चों की चार साल पहले कोई गुमशुदगी दर्ज नहीं हुई थी।