अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी सात दिनों के भारत दौरे पर आए हुए हैं।
आज (शुक्रवार, 10 अक्टूबर को) उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। इसके बाद अफगान दूतावास में उनके लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स का आयोजन किया गया था लेकिन बड़ी बात यह रही कि इस आयोजन में किसी भी महिला पत्रकार को आमंत्रित नहीं किया गया था।
यह भारतीय सरजमीं पर तालिबान के लैंगिक भेदभाव का बड़ा उदाहरण है, जिसकी तीखी आलोचना हो रही है।
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी सात दिनों के भारत दौरे पर आए हुए हैं। आज (शुक्रवार, 10 अक्टूबर को) उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की।
इसके बाद अफगान दूतावास में उनके लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स का आयोजन किया गया था लेकिन बड़ी बात यह रही कि इस आयोजन में किसी भी महिला पत्रकार को आमंत्रित नहीं किया गया था। यह भारतीय सरजमीं पर तालिबान के लैंगिक भेदभाव का बड़ा उदाहरण है, जिसकी तीखी आलोचना हो रही है।
यह प्रेस वार्ता मुत्ताक़ी और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच हुई बैठकों के बाद बुलाई गई थी। इस सम्मेलन में केवल 20 पत्रकारों ने ही भाग लिया।
बाद में जारी तस्वीरों में तालिबान के पुरुष नेताओं को केवल पुरुषों के लिए आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दिखाया गया है।
तालिबान के इस बहिष्कार से पत्रकारों, नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स में आक्रोश फैल गया है। लोगों ने इसे महिलाओं के प्रति घृणा का स्पष्ट मामला और भारत के लोकतांत्रिक लोकाचार का अपमान बताया है।
इस मामले से परिचित लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस कार्यक्रम में भागीदारी पर अंतिम निर्णय मुत्ताक़ी के साथ आए तालिबान अधिकारियों ने ही लिया था।
उन्होंने बताया कि हालांकि भारतीय अधिकारियों ने संकेत दिया था कि भागीदारी व्यापक होनी चाहिए और इसमें महिला पत्रकारों को भी शामिल किया जाना चाहिए लेकिन अंतत: ऐसा नहीं हो सका।
यह एक दुर्लभ मामला
यह दुर्लभ मामला है जब महिला पत्रकारों को अन्य देशों द्वारा नई दिल्ली में आयोजित आधिकारिक कार्यक्रमों और मीडिया संवादों से बाहर रखा गया हो।
यह बात भी ध्यान देने वाली है कि भारतीय अधिकारियों को यह तुरंत पता नहीं चल सका कि तालिबान ने भारतीय अधिकारियों को औपचारिक रूप से सूचित किया था कि वह मुत्ताक़ी के कार्यक्रम में महिला पत्रकारों को स्वीकार नहीं करेगा।
यह एक दुर्लभ मामला
यह दुर्लभ मामला है जब महिला पत्रकारों को अन्य देशों द्वारा नई दिल्ली में आयोजित आधिकारिक कार्यक्रमों और मीडिया संवादों से बाहर रखा गया हो।
यह बात भी ध्यान देने वाली है कि भारतीय अधिकारियों को यह तुरंत पता नहीं चल सका कि तालिबान ने भारतीय अधिकारियों को औपचारिक रूप से सूचित किया था कि वह मुत्ताक़ी के कार्यक्रम में महिला पत्रकारों को स्वीकार नहीं करेगा।