अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सुझाए गए गाजा शांति वार्ता पर इजरायल और हमास दोनों की सहमति बन गई है।
इस समझौते को लेकर ट्रंप का कहना है कि इजरायल और हमास के बीच में हुआ यह समझौता बहुत मजबूत, टिकाऊ और लंबी शांति की ओर पहला कदम है।
एक ऐसा कदम जो पिछले दो सालों से चले आ रहे गाजा संघर्ष को समाप्त कर देगा। ट्रंप कुछ भी कहें लेकिन इजिप्ट के शर्म अल-शेख रिसॉर्ट में इजरायल और हमास की अप्रत्यक्ष वार्ता के बाद सहमति बनाने वाला युद्ध विराम का केवल पहला चरण है।
इसमें हमास इजरायली बंधकों को फिलिस्तीनी कैदियों के बदले रिहा करेगा और फिर गाजा क्षेत्र से इजरायल की आंशिक वापसी होगी।
दोनों पक्षों के वार्ताकारों सफल बातचीत के बाद भी इस संघर्ष को पूरी तरह से खत्म करने में बाधा बने कई पेचीदा मुद्दे अभी भी बाकी हैं।
इनमें सबसे बड़ा मुद्दा है हमास का निरस्त्रीकरण, इजरायली सेना की वापसी की सीमा और आखिर में कि इस युद्ध विराम के बाद एक नया युद्ध फिर से शुरू नहीं हो जाएगा आखिर इसकी गारंटी कौन देगा?
क्या गाजा में बंदूके खामोश हैं?
7 अक्तूबर को हुए हमास के हमले के बाद से लेकर अब तक गाजा में बंदूकें खामोश नहीं हुए हैं। अल्पकाल के लिए तो थोड़ा बहुत युद्ध विराम हुआ है, लेकिन पूरी तरह से खामोशी इस पर संशय है।
शुक्रवार को जब हमास ने पहली बार ट्रंप के 20 सूत्रीय योजना को आंशिक रूप से स्वीकार करने का संकेत दिया, तब उनकी सबसे बड़ी मांग बमबारी रोकने की ही थी।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक लेकिन ऐसा हुआ नहीं है। शुक्रवार के बाद से हवाई हमलों और गोलीबारी में दर्जनों फिलिस्तीनी मारे गए हैं। हालांकि, बुधवार को जब ट्रंप ने शांति समझौते की घोषणा कर दी उसके बाद से बमबारी धीरे-धीरे कम होती रही।
ट्रंप की घोषणा के बाद इजरायल और गाजा दोनों जगह खुशी का माहौल है। तेल अवीव में बंधकों के परिवार तथाकथित बंधक चौक पर खुशी से झूम रहे हैं और अपने परिवार के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं गाजा में लोग खंडहरों में इकट्टे होकर खुशी मना रहे थे। हालांकि उसके बाद भी विस्फोटों की आवाजें सुनाई दे रहीं थी।
इस शांति समझौते में क्या अलग?
ट्रंप द्वारा कई देशों के सहयोग से तैयार किया गया यह समझौता हमास और इजरायल के बीच शांति को स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।
हालांकि यह एक आंशिक समझौता है लेकिन पिछली समझौतों से इसमें सबसे बड़ा अंतर यह है कि इसमें पूर्ण समझौते तक पहुंचने में किसी तरह की समय सीमा नहीं है। इस वजह से अगर बातचीत रुकती है तो शत्रुता फिर से शुरू हो सकती है।
हालांकि हमास की तरफ से कहा गया है कि उन्हें मध्यस्थों की तरफ से आश्वस्त किया गया है और अमेरिका ने युद्ध खत्म कराने का वादा किया है।
कई विशेषज्ञों को यह समझौते के टिकाऊ होने या न होने को लेकर आशंका है। अभी इस पर फैसला होना बाकी है। क्योंकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गठबंधन सरकार के सदस्य दल पहले से ही युद्ध को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं।
नेतन्याहू के वित्तमंत्री बेजालेल स्मोट्रिच जो कि हमास के कट्टर विरोधी और फिलिस्तीनियों को जरा सी भी रियायत देने के कट्टर विरोधी हैं।
उन्होंने इस समझौते को लेकर कहा है कि एक बार बंधकों की वापसी हो जाने के बाद हमास को पूरी तरह से नष्ट किया जा सकता है।
इस समझौते की सबसे खास बात यह रही कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप दोनों पक्षों को सहमत करने को लेकर काफी मुखर रहे। इस वजह से वाइट हाउस में खड़े होकर नेतन्याहू ने और फिर एक धमकी के बाद हमास ने इस पर अपनी आंशिक सहमति जता दी।
अब आगे का क्या?
7 अक्तूबर को हमास द्वारा इजरायल के मासूम लोगों के नरसंहार से शुरू हुआ यह युद्ध ट्रंप समझौते के बाद खत्म होता हुआ नजर आ रहा है। लेकिन इसको लेकर अभी तक किसी बी तरह की कोई समय सीमा नहीं है।
इजरायली प्रधानमंत्री के कार्यालय के मुताबिक इजरायल की रक्षा कैबिनेट की बैठक के 24 घंटे के भीतर युद्ध विराम हो जाएगा। इस 24 घंटे के बाद, गाजा में मौजूद बंधकों को भी 72 घंटे के भीतर रिहा किया जाएगा।