अमेरिकी महानगरीय चकाचौंध से दूर राजमार्गों के किनारे बिखरे उन छोटे-मोटे मोटलों में, जहां थके-हारे यात्रियों को सस्ता आश्रय मिलता है वहां एक अनकही डरावनी कहानी छिपी है।
यह कहानी है गुजराती प्रवासियों की- खासकर पटेल समुदाय की जो दशकों से अमेरिकी हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री पर राज कर रहे हैं।
लेकिन 2025 में यह सपना खौफनाक रंग ले चुका है। इस साल अब तक सात गुजराती मूल के लोग मोटलों से जुड़ी हिंसा में मारे जा चुके हैं।
सितंबर में डलास में एक मोटेल मैनेजर का सिर कलम कर दिया गया, तो हाल ही में पेंसिल्वेनिया और नॉर्थ कैरोलिना में गोलीबारी की घटनाओं ने पूरे समुदाय को हिलाकर रख दिया।
मोटल, गैस स्टेशन और कन्वीनियंस स्टोर चलाने में इस समुदाय का दबदबा इतना है कि आज अमेरिका के करीब 60 प्रतिशत मोटल्स गुजराती मालिकों के अधीन हैं। क्यों बन रहा है मोटेल बिजनेस गुजरातियों के लिए घातक? आइए विस्तार से समझते हैं।
पटेलों का अमेरिकी मोटेल साम्राज्य: एक चमत्कारिक यात्रा
यह कहानी 1940 के दशक से शुरू होती है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, कैलिफोर्निया में एक जापानी-अमेरिकी मोटेल मालिक को नजरबंदी शिविर में भेज दिया गया था।
इसके बाद गुजराती प्रवासी कांजीभाई मंचू देसाई ने उस मोटेल को संभाला। कांजीभाई को अमेरिका में भारतीय होटल उद्योग के ‘गॉडफादर’ के रूप में जाना जाता है।
उन्होंने पहला मोटल खरीदा और वहीं से यह सिलसिला शुरू हुआ। देसाई गुजरात के एक गांव से आए थे। उन्होंने देखा कि ये मोटेल सस्ते हैं, सड़क किनारे बने, लेकिन रखरखाव की कमी से जूझ रहे हैं। उन्हें इसे एक सुनहरा अवसर माना।
गुजरात का पटेल समुदाय व्यापारिक कौशल के लिए जाना जाता है। उन्होंने इस अवसर को दोनों हाथों से लपका। 1960-70 के दशक में, युगांडा से निकाले गए गुजराती शरणार्थियों ने अमेरिका में पनाह ली।
उनके पास ज्यादा पूंजी नहीं थी, लेकिन पारिवारिक नेटवर्क और कड़ी मेहनत थी। वे मोटलों को सस्ते में खरीदते, पूरे परिवार के साथ रहते-काम करते, और कम लागत में मुनाफा कमाते।
आज, एशियन अमेरिकन होटल ओनर्स एसोसिएशन (AAHOA) के अनुसार, अमेरिका के 50,000 मोटलों में से आधे से ज्यादा (लगभग 60%) गुजराती मूल के हैं। इनमें 70% मोटलों के मालिक पटेल उपनाम वाले हैं।
यह ‘पटेल मोटेल कार्टेल’ के नाम से मशहूर है- एक ऐसा नेटवर्क जहां रिश्तेदार एक-दूसरे को लोन देते हैं, सप्लाई साझा करते हैं, और बिजनेस बढ़ाते हैं।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, आज गुजराती अमेरिकी आबादी का केवल 1 प्रतिशत हैं, लेकिन वे देश के 60 प्रतिशत से अधिक मोटल्स के मालिक हैं। “द पटेल मोटल स्टोरी” नामक डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक अमर शाह बताते हैं कि यह सामुदायिक समर्पण, त्याग और व्यवसायिक अनुशासन की कहानी है।
एशियन अमेरिकन होटल ओनर्स एसोसिएशन में भी 20,000 से अधिक सदस्य हैं, जिनके पास करीब 33,000 संपत्तियां हैं- इनमें अधिकांश सदस्य गुजराती मूल के हैं।
सफलता की यह ऊंचाई अब खतरे की घाटी में बदल रही
लेकिन सफलता की यह ऊंचाई अब खतरे की घाटी में बदल रही है। छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों में बसे ये मोटेल अक्सर अपराध का केंद्र बन जाते हैं जहां ड्रग्स, चोरी, विवाद सामने आ रहे हैं।
इसी के चलते मोटेल मालिक या मैनेजर, जो अक्सर अकेले या परिवार के साथ रहते हैं, वे सबसे पहले निशाने पर आते हैं। 2021 में USA Today की एक जांच ने बताया था कि मोटल्स पर 911 इमरजेंसी कॉल्स की संख्या असामान्य रूप से अधिक है। कारण- यहां ठहरने वाले अधिकतर ग्राहक अस्थायी या ट्रांजिट में होते हैं, जिससे अपराधों की संभावना बढ़ जाती है।
2025 की खौफनाक घटनाएं: सात मौतें, अनगिनत सवाल
इस साल की शुरुआत से ही हिंसा की लहर चल पड़ी है। फरवरी में अलबामा के शेफील्ड में 76 वर्षीय प्रवीण रावजीभाई पटेल को एक ग्राहक ने कमरे के विवाद में गोली मार दी।
आरोपी विलियम जेरेमी मूर को गिरफ्तार किया गया, लेकिन AAHOA ने इसे ‘व्यापारियों पर बढ़ते हमलों’ का प्रतीक बताया।
फिर आया सितंबर का सबसे भयावह मामला। 10 सितंबर को डलास के डाउनटाउन सूट्स मोटेल में 50 वर्षीय चंद्रा मौली नागमल्लैया को सहकर्मी योरडानिस कोबोस-मार्टिनेज ने माचेटे से सिर कलम कर दिया। विवाद? एक टूटी वॉशिंग मशीन को लेकर हुआ था।
नागमल्लैया वैसे को कर्नाटक से थे लेकिन गुजराती मोटेल मालिक परिमल पटेल के किराएदार थे।
नागमल्लैया ने निर्देश देने के लिए किसी और को भेजा था, जिससे आरोपी भड़क गया। नागमल्लैया की पत्नी और बेटे की आंखों के सामने यह क्रूर हत्या हुई।
वीडियो फुटेज में नागमल्लैया मदद की गुहार लगाते दिखे, लेकिन देर हो चुकी थी। आरोपी ने सिर को कचरा डिब्बे में फेंक दिया। बाइडेन प्रशासन पर आरोप लगा कि उन्होंने इस अपराधी को पहले ही रिहा कर दिया था।
ट्रंप ने इसे ‘अवैध अप्रवासियों की समस्या’ बताते हुए सख्त कार्रवाई का वादा किया। लेकिन समुदाय में गुस्सा है।
अक्टूबर ने तो जैसे जख्मों पर नमक छिड़क दिया। 3 अक्टूबर को नॉर्थ कैरोलिना के चार्लोट में लैंपलाइटर इन मोटेल पर गोलीबारी हुई। अनिल पटेल और पंकज पटेल- दोनों गुजराती मारे गए।
हमलावरों ने सात राउंड फायर किए। एक संदिग्ध गिरफ्तार किया गया है। कारण अज्ञात, लेकिन ड्रग्स या लूट का शक बताया जा रहा है।
इस साल अब तक कम से कम सात गुजराती मूल के कारोबारियों की हत्या अमेरिका में हो चुकी है। सबसे ताजा घटना पेंसिल्वेनिया के एलेगेनी काउंटी की है, जहां सोमवार को 50 वर्षीय राकेश पटेल की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
राकेश, जो सूरत के रहने वाले थे, एक मोटल में पार्टनर और मैनेजर के तौर पर काम करते थे। राकेश मोटेल के बाहर शोर सुनकर निकले थे।
उन्होंने हमलावर स्टैनली यूजीन वेस्ट को रोका और पूछा, ‘तुम ठीक तो हो, दोस्त?’ आरोपी वेस्ट दो हफ्ते से मोटेल में एक महिला और बच्चे के साथ ठहरा था।
उसने पहले महिला को गोली मारी, फिर राकेश को सिर में गोली मारी। राकेश की मौत मौके पर हो गई। वेस्ट ने बाद में एक डिटेक्टिव को भी घायल किया, लेकिन गिरफ्तार हो गया।