छत्तीसगढ़; धमतरी: बेरंग और फटे तिरंगे तले कांग्रेस के नए जिलाध्यक्ष की खोज… ये बेपरवाही की जा सकती है नजरअंदाज़?…

सैयद जावेद हुसैन (सह संपादक – छत्तीसगढ़):

धमतरी- कांग्रेस जिलाध्यक्ष के चुनाव के मद्देनजर पर्यवेक्षक रेहाना रियाज चिश्ती आज राजीव भवन में पहुंची हैं, इस दौरान वे जिले के तमाम नेताओं कार्यकर्ताओं से बैठकें लेकर जिलाध्यक्ष का चयन करने की प्रक्रियाओं का बारीकी से मूल्यांकन कर रहीं हैं, उन्होंने पत्रकार वार्ता कर बताया कि आगामी 8 अक्टूबर तक वे जिले के तमाम कांग्रेसी नेताओं कार्यकर्ताओं से रूबरू होंगी, इसके बाद में 6 लोगों के नाम फाइनल कर आलाकमान तक पहुंचाएंगी। 

इस दौरान जिले के तमाम कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ताओं का हुजूम आज राजीव भवन में नज़र आया। 

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राजीव भवन में ही तिरंगे का किया जा रहा अपमान…

बता दें कि राजीव भवन में अक्सर राष्ट्रीय, प्रदेश स्तरीय व ज़िला स्तर के नेताओं व कार्यकर्ताओं का आवागमन लगा रहता है, फिर भी इन नेताओं के द्वारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान किया जा रहा है। लगभग रोज़ाना ही यहां वर्तमान जिलाध्यक्ष, विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व महापौर समेत अन्य नेता कार्यकर्ता यहां पहुंचते हैं, जिनकी निगाहें राजीव भवन में लगे देश के गौरव के प्रतीक तिरंगे पर भी पड़ती ही होंगी! लेकिन उनकी ये अनदेखी राष्ट्र के गौरव पर दाग़ लगा रही है, और उनकी देशभक्ति भी दिखा रही है!

यहां के ज़मीनी कार्यकर्ताओं ने बताया कि राजीव भवन के उद्घाटन के समय से भवन के ऊपरी हिस्से में लगे तिरंगे झंडे को अब तक बदला नहीं जा सका है, जिसके चलते उसका रंग फीका पड़ गया है इसके अलावा वो कई जगहों से फट भी गया है। इस तिरंगे पर रौशनी की भी कोई व्यवस्था नहीं है!

जबकि इसके बारे में कई बार जिम्मेदारों को अवगत भी कराया जा चुका है, बावजूद उनकी ये लापरवाही सवाल खड़े कर रही है कि ये बेपरवाही की जा सकती है नजरअंदाज़?

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क्या है राष्ट्रीय ध्वज के नियम…

तिरंगा भारत का राष्ट्रीय ध्वज है जिसे 20 जुलाई 2022 में हुए एक संशोधन के बाद अब ध्वज को दिन और रात दोनों समय फहराया जा सकता है, बशर्ते वह खुले में हो और अगर अंधेरा हो तो उस पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जाए। जुलाई 2022 के पहले राष्ट्रीय ध्वज केवल सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच ही फहराया जा सकता था।

इसके अलावा भारतीय ध्वज संहिता 2002 के अनुसार, अगर किसी परिसर में वर्षों से लगा तिरंगा क्षतिग्रस्त हो गया है, तो उसे सम्मानपूर्वक हटाकर एक नया ध्वज उस स्थान पर लगाया जाना चाहिए। क्षतिग्रस्त ध्वज को तिरंगे की गरिमा के साथ निपटाना आवश्यक है और इसे लापरवाही से फेंकना या अपमानित करना एक अपराध के दायरे में आता है, जिसमें सज़ा या जुर्माने का भी प्रावधान है। 

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विडंबना है कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के जिले के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का इस तरह से अपमान करना समझ से परे है। इस मामले में राजीव भवन में कुछ लोगों के बीच ये चर्चा भी हो रही थी कि जिनसे राष्ट्रीय ध्वज नहीं सम्हाला जा रहा वे जिले का क्या उद्धार करेंगे?

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