राहुल गांधी की कार-बाइक तुलना पर BJP का तंज: बोले- हार्ले-डेविडसन और टोयोटा के लोग पछता रहे होंगे…

राहुल गांधी कोलंबिया की यूनिवर्सिटी में कार और बाइक की तुलना कर चर्चा में हैं। उनकी इस टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा निशाना साधा है।

शुक्रवार को भाजपा की तरफ से कहा गया कि राहुल गांधी के अद्भुत इंजीनियरिंग ज्ञान को देखकर हार्ले-डेविडसन से लेकर टोयोटा तक के इंजीनियर अपनी छाती पीट रहे होंगे।

लोकसभा नेता प्रतिपक्ष की टिप्पणी को बकवास बताते हुए केंद्र की सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि अगर किसी को अभी भी राहुल गांधी के ज्ञान के बारे में संदेह है, तो उसे इस कार्यक्रम में राहुल ने जो भी कहा है उसे एक बार फिर से ध्यान से सुनना चाहिए। ऐसा करने पर जो संदेह है, वह भी समाप्त हो जाएगा।

भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में राहुल गांधी के बयान की वीडियो चला कर पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “”हार्ले-डेविडसन से लेकर टोयोटा और फॉक्सवैगन से लेकर फोर्ड तक, मैकेनिकल इंजीनियर उनके द्वारा दिए गए अद्भुत इंजीनियरिंग ज्ञान को सुनकर अपनी छाती पीट रहे होंगे।”

त्रिवेदी के अलावा भाजपा आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने भी कांग्रेस नेता की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए कहा, “मैंने इतनी बकवास बात अब तक नहीं सुनी। अगर कोई यह समझ सके कि राहुल गांधी यहां क्या कहना चाह रहे हैं, तो मुझे खुशी होगी।”

मालवीय ने राहुल के भाषण का एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा,”अगर आप भी मेरी तरह हतप्रभ हैं, तो निश्चिंत रहें, आप अकेले नहीं है।”

क्या कहा था राहुल गांधी ने?

दरअसल, बुधवार को कोलंबिया की ईआईए यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित किया था। उस दौरान उन्होंने वहां उपस्थित लोगों के सामने एक दिलचस्प सवाल रखा।

उन्होंने पूछा कि एक मोटरसाइकिल का वजन 100 किलो और कार का वजन 3000 किलो क्यों होता है?

उन्होंने पूछा, “यदि कार में एक यात्री सवार है तो एक यात्री को ले जाने के लिए कार में 3,000 किलो धातु की आवश्यकता होती है। और एक मोटरसाइकिल में 100 किलो धातु होती है, जो दो यात्रियों को ले जा सकती है।

तो फिर एक मोटरसाइकिल 150 किलो धातु के साथ दो यात्रियों को ले जाने में सक्षम क्यों है, जबकि एक कार को 3,000 की आवश्यकता होती है?”

राहुल ने वहां मौजूद इंजीनियरिंग के छात्रों से इसका जवाब देने का आग्रह करते हुए कांग्रेस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि उनका प्रश्न इलेक्ट्रिक (परंपरागत ईंधन से चलने वाले वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों) की ओर बदलाव के केंद्र में है।

वहां मौजूद एक छात्र ने इसका जवाब देने की कोशिश की, लेकिन राहुल गांधी ने कहा, “नहीं। मेरा सवाल यह है कि कार में ऐसा क्या है कि उसे 3,000 किलो धातु की जरूरत पड़ती है?”

उन्होंने कहा, “जवाब है, इंजन की वजह से, क्योंकि टक्कर लगने पर इंजन ही आपकी जान ले लेता है। है ना? और मोटरसाइकिल हल्की होती है इसलिए दुर्घटना होने पर इंजन गायब हो जाता है। है ना?”

गांधी ने कहा, “मोटरसाइकिल में, जब आप पर कोई प्रभाव पड़ता है, तो इंजन आपसे अलग हो जाता है। इसलिए इंजन आपको नुकसान नहीं पहुंचाता। जबकि कार में, जब आप पर कोई असर पड़ता है, तो इंजन कार में आ जाता है। इसलिए पूरी कार को इंजन को आपको मरने से रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। गांधी ने कहा कि “इलेक्ट्रिक मोटर उस केंद्रीकृत ऊर्जा प्रणाली को तोड़ देती है।”

उन्होंने कहा, “इलेक्ट्रिक मोटर आपको मोटर (पारंपरिक ईंधन कारों में लगने वाली) को विभिन्न स्थानों पर लगाने की सुविधा देती है। इसलिए इलेक्ट्रिक मोटर शक्ति का विकेंद्रीकरण है और यही वास्तव में इसकी प्रभावशीलता है।” उन्होंने श्रोताओं से पूछा, “ठीक है?”

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