अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्लामी देश कतर को अमेरिकी सुरक्षा की ऐतिहासिक गारंटी देने वाले एक कार्यकारी आदेश यानी एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह आदेश स्पष्ट रूप से कहता है कि कतर पर किसी भी सशस्त्र हमले को अमेरिका की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा माना जाएगा, और जरूरत पड़ने पर अमेरिका कूटनीतिक, आर्थिक या सैन्य कार्रवाई करेगा।
यह कदम इजरायल के हालिया दोहा एयरस्ट्राइक के ठीक बाद आया है, जिसमें हमास नेताओं को निशाना बनाया गया था।
ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन पर माफी मंगवाने के बाद इस आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि एक मुस्लिम देश पर ट्रंप इतने उदार क्यों दिख रहे हैं?
दोहा हमला और माफी की मजबूरी
सब कुछ 9 सितंबर को शुरू हुआ, जब इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में एक एयरस्ट्राइक की। निशाना था हमास के शीर्ष नेता, जो अमेरिकी युद्धविराम प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे थे।
हमले में छह लोग मारे गए, जिनमें एक कतरी सुरक्षा अधिकारी और हमास नेता का बेटा शामिल था। हमास के मुख्य नेता बच निकले, लेकिन इजरायल ने इसे ‘पूरी तरह जायज’ बताया। कतर ने हमले को ‘राष्ट्र प्रायोजित आतंकवाद’ करार दिया और मध्यस्थता रोक दी।
कतरी प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने इसे ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन’ बताया। ट्रंप ने भी हमले पर नाराजगी जताई और कहा, ‘मैं हर पहलू से नाखुश हूं।’
ट्रंप ने नेतन्याहू को चेतावनी दी कि ‘अमेरिका के प्रमुख सहयोगी पर हमला करते समय सावधान रहो।’ 29 सितंबर को वाइट हाउस में ट्रंप-नेतन्याहू की बैठक के दौरान ट्रंप ने ओवल ऑफिस से ही फोन करवाया।
नेतन्याहू ने कतरी पीएम को फोन किया और ‘गहरा अफसोस’ जताया। उन्होंने कहा, ‘हमास लक्ष्यों पर हमले में कतरी सैनिक की मौत पर खेद है और कतर की संप्रभुता का उल्लंघन अनजाने में हुआ। ऐसा दोबारा नहीं होगा।’
वाइट हाउस ने इसे ‘माफी’ बताया, जबकि नेतन्याहू के कार्यालय ने ‘खेद’ कहा। एक वायरल फोटो में ट्रंप फोन गोद में थामे और नेतन्याहू कागज पढ़ते दिखे, जो तनाव को दर्शाती है।
ट्रंप ने कतर की रक्षा का संकल्प जताते हुए शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर किए
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें ऊर्जा संपन्न देश कतर की रक्षा के लिए अमेरिकी सैन्य कार्रवाई सहित विभिन्न कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई गई है।
‘वाइट हाउस’ की वेबसाइट पर बुधवार को उपलब्ध इस आदेश की विषय-वस्तु ट्रंप द्वारा कतर के लोगों को आश्वस्त करने का एक और उपाय प्रतीत होता है।
आदेश में दोनों देशों के “घनिष्ठ सहयोग” और “साझा हित” का हवाला देते हुए ‘‘बाहरी हमले के विरुद्ध कतर की रक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की गारंटी’’ देने का संकल्प जताया गया है।
आदेश में कहा गया है, ‘‘अमेरिका कतर के क्षेत्र, संप्रभुता या महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर किसी भी सशस्त्र हमले को अमेरिका की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा मानेगा।’’ इसमें कहा गया, ‘‘ऐसे हमले की स्थिति में अमेरिका अपने और कतर के हितों की रक्षा करने तथा शांति एवं स्थिरता बहाल करने के लिए सभी वैध और उचित कदम उठाएगा- जिसमें राजनयिक, आर्थिक और, यदि आवश्यक हो, तो सैन्य कार्रवाई भी शामिल हैं।’’
यह सुरक्षा गारंटी नाटो के अनुच्छेद 5 के समान है, जो किसी एक सदस्य देश पर हमले को सभी पर हमला मानता है, लेकिन यह एक कार्यकारी आदेश है, इसलिए सीनेट की मंजूरी के बिना कम बाध्यकारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम कतर को इजरायल के भविष्य के हमलों से बचाने के लिए है, साथ ही गाजा युद्ध समाप्त करने के ट्रंप के प्रस्ताव को मजबूत करने का प्रयास है।
ट्रंप ने आदेश में कतर को “शांति, स्थिरता और समृद्धि की खोज में दृढ़ सहयोगी” बताया और संघर्ष समाधान में इसकी भूमिका की सराहना की।
ट्रंप की ‘मेहरबानी’ के पीछे क्या राज?
ट्रंप की 21-सूत्रीय गाजा योजना पर कतर मध्यस्थ है। इजरायली हमले के बाद कतर पीछे हट गया था लेकिन माफी और गारंटी से उसे वापस लाया गया।
नेतन्याहू ने योजना का समर्थन किया। कतर अमेरिका का ‘मेजर नॉन-नाटो सहयोगी’ है। यह अफगानिस्तान निकासी, ईरान मध्यस्थता और ऊर्जा सुरक्षा में मदद करता है। ट्रंप ने मई 2025 में दोहा दौरा किया था।
ट्रंप इजरायल के सहयोगी हैं, लेकिन कतर को मजबूत कर क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना चाहते हैं। कुछ का मानना है, यह नेतन्याहू को ‘सुधारने’ का तरीका है।
ट्रंप और कतर का विमान गिफ्ट: क्या है यह विवाद?
पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कतर सरकार से एक लग्जरी बोइंग 747-8 जेट विमान गिफ्ट में मिला था जिसकी कीमत करीब 400 मिलियन डॉलर बताई जा रही है।
इसने राजनीतिक हलचल मचा दी है। ट्रंप इसे एयर फोर्स वन के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं, लेकिन यह गिफ्ट अमेरिकी संविधान के ‘फॉरेन एमोल्यूमेंट्स क्लॉज’ (विदेशी प्रभाव रोकने वाले नियम) का उल्लंघन माना जा रहा है।
आलोचक इसे ‘भ्रष्टाचार’ और ‘राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम’ बता रहे हैं, जबकि ट्रंप इसे ‘महान इशारा’ कहकर खारिज कर रहे हैं।
ट्रंप लंबे समय से मौजूदा एयर फोर्स वन (बोइंग 747-200, 1990 से पुराना) की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि बोइंग की नई जेट (जो पहली बार में ऑर्डर की थी) में दो साल की देरी हो रही है।
मई 2025 में कतर यात्रा के दौरान ट्रंप ने बोइंग 747-8 को ‘पैलेस इन द स्काई’ (आकाश का महल) कहा, जो कतर का लग्जरी जेट है।
ट्रंप का दावा है कि कतर ने खुद ‘मुफ्त गिफ्ट’ ऑफर किया, लेकिन सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन (पेंटागन) ने पहले कतर से संपर्क किया था।
शुरू में खरीद या लीज की बात थी, लेकिन बाद में इसे ‘अनकंडीशनल डोनेशन’ (बिना शर्त उपहार) बना दिया गया। फरवरी 2025 में ट्रंप ने फ्लोरिडा में इस जेट का दौरा किया।