युवती के बलात्कार में मुख्य आरोपी की मदद करने वाले को कर्नाटक हाईकोर्ट ने झटका दे दिया है। अदालत ने मनुस्मृति के श्लोक और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की बात का जिक्र किया और आरोपी की जमानत याचिका रद्द कर दी।
आरोप हैं कि याचिकाकर्ता ने वारदात के समय पीड़िता के भाई को रोककर रखा और मुख्य आरोपी की मदद की।
जस्टिस एस रचैया ने कहा कि इस घटना ने पीड़िता को गहरी मानसिक चोट पहुंचाई है। बार एंड बेंच के अनुसार,
उन्होंने कहा, ‘दूसरे आरोपी के साथ मिलकर इस आरोपी ने जो काम किया है, वो युवती के जीवन पर एक धब्बे की तरह रहेगा। युवती के लिए उस दर्द से बाहर आना बहुत मुश्किल होगा जो उन्होंने झेला है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसे में यहां मनुस्मृति के श्लोक का जिक्र करना सही होगा कि यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला क्रिया।’
इसका मतलब है कि जहां स्त्री का सम्मान होता है, वहां देवता रहते हैं और जहां महिला का अपमान किया जाता है, वहां किए गए सभी काम असफल हो जाते हैं।
जस्टिस ने कहा कि गांधी ने कहा था कि जब तक महिलाएं रात में आजादी से नहीं घूम सकेंगी, तब तक भारत को सच्ची आजादी नहीं मिलेगी।
उन्होंने कहा, ‘आजादी पर कही गई महात्मा गांधी की बात का जिक्र करना यहां सही होगा कि जिस दिन एक महिला रात में सड़कों पर आजादी से घूम सकेंगी। उस दिन हम कह सकते हैं कि भारत ने आजादी हासिल कर ली है।’
क्या था मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 2 अप्रैल की है। तब पीड़िता रात करीब 1 बजकर 30 मिनट पर कर्नाटक से केरल लौटी थी। रेलवे स्टेशन से बाहर आने के बाद वह अपने भाई के साथ भोजन की तलाश में निकले थे और वहां दोनों युवकों ने उन्हें रोक लिया।
इसके बाद उन्हें एक सुनसान जगह पर ले जाया गया, जहां एक आरोपी ने युवती के साथ रेप किया और दूसरे आरोपी सैयद परवेज मुशर्रफ (जमानत याचिका देने वाला) ने पीड़िता के भाई को पकड़कर रखा।
अभियोजन पक्ष की दलील है कि सह आरोपी भी पीड़िता का रेप करना चाहता था। हालांकि, जब युवती ने मदद के लिए आवाज लगाई तो भीड़ जमा हो गई।
इसके चलते मुख्य आरोपी वहां से भाग निकला और सह आरोपी और मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता को भीड़ ने पकड़ लिया था। सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी ने पीड़िता के कजिन को धमकाकर वारदात को अंजाम देने में मदद की है।