अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने हाल ही में H-1B वीजा पर आवेदन शुल्क बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दिया है। इससे भारत समेत पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है लेकिन इसी बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत संग रिश्ते सुधारने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है।
उन्होंने कहा है कि उनका देश उन कुशल पेशेवरों का स्वागत करेगा जो ट्रंप प्रशासन के संशोधित एच-1बी वीज़ा आवेदन शुल्क से प्रभावित होंगे।
पीएम कार्नी की तरफ से यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद अक्टूबर के मध्य में अपनी पहली यात्रा पर भारत आने वाली हैं और वह इसकी तैयारी कर रही हैं।
दरअसल, पीएम कार्नी की यह घोषणा और अनीता आनंद की प्रस्तावित भारत यात्रा कनाडा के बदलते दृष्टिकोण को इंगित करता है। पिछली जस्टिन ट्रूडो सरकार के दौरान भारत और कनाडा के बीच करीब दो साल तक रिश्ते तनावपूर्ण रहे थे।
लेकिन पीएम कार्नी ने ट्रंप के झटकों से राहत देने के लिए कदम बढ़ाकर भारत संग रिश्ते सुधारने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है।
कनाडाई पीएम कार्नी ने क्या कहा?
कार्नी ने शनिवार को लंदन में कहा, “यह स्पष्ट है कि यह उन लोगों को आकर्षित करने का अवसर है जिन्हें पहले तथाकथित एच-1बी वीज़ा मिलता था और मैं इसे सरल बनाने जा रहा हूँ। इनमें से एक बड़ा समूह तकनीकी क्षेत्र में है।”
उन्होंने कहा, “उनमें से ज़्यादा लोगों (एच-1बी वीज़ा धारकों) को अमेरिका का वीज़ा नहीं मिलेगा। ये लोग कुशल हैं और यह कनाडा के लिए एक अवसर है… हम जल्द ही इस पर एक प्रस्ताव लाएँगे।”
अमेरिकी H-1B वीजा के लाभार्थियों में 72% भारतीय
कार्नी का यह बयान ट्रंप द्वारा नए एच-1बी वीज़ा की फीस में भारी बढ़ोतरी करके उसे 1,00,000 डॉलर करने के कुछ दिनों बाद आया है, जिससे भारतीय पेशेवरों में घबराहट और अनिश्चितता फैल गई है, जो इस कार्यक्रम के लाभार्थियों में लगभग 72% हैं।
भारत इस मुद्दे पर अमेरिकी वार्ताकारों के साथ बातचीत कर रहा है और उन नए साझेदारों के साथ भी बातचीत खुली है जो भारतीय पेशेवरों को इसी तरह के अवसर प्रदान करने के इच्छुक हैं।
दो साल पहले भारत-कनाडा संबंधों में आ गई थी गिरावट
बता दें कि सितंबर 2023 में भारत और कनाडा के संबंधों में तब गिरावट आ गई थी जब तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जून 2023 में कनाडा स्थित खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय सरकारी एजेंटों की संलिप्तता के पुखिता सबूत होने के आरोप लगाए थे।
हालांकि, भारत ने उन आरोपों को ना सिर्फ खारिज किया था बल्कि उन्हें बेतुका और पूर्वाग्रह से प्रेरित बताया था। इस तनाव के कारण दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध बिगड़ गए थे।
दोनों पक्षों ने अपने यहां से उच्चायुक्तों और अन्य वरिष्ठ राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था।