पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर संगठन की जमकर सराहना की है।
उन्होंने ‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आरएसएस में भावना और अनुशासन ही महत्व रखता है और यह उसकी असली ताकत है।
उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों के प्रत्येक कार्य में ‘राष्ट्र प्रथम’ को प्राथमिकता दी जाती है।
मोदी ने हर महीने के आखिरी रविवार को होने वाले ‘मन की बात’ संबोधन में कहा कि केशव बलिराम हेडगेवार ने देश को बौद्धिक गुलामी से मुक्त कराने के लिए 1925 में विजयादशमी के दिन आरएसएस की स्थापना की थी।
तब से इसकी यात्रा जितनी प्रेरणादायक है उतनी ही उल्लेखनीय और अभूतपूर्व भी रही है।
खुद आरएसएस के प्रचारक रहे मोदी ने हेडगेवार के उत्तराधिकारी एमएस गोलवलकर की भी प्रशंसा की और कहा कि उनका यह कथन कि ‘यह मेरा नहीं है, यह राष्ट्र का है’ लोगों को स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए प्रेरित करता है।
उन्होंने कहा, ‘गुरुजी गोलवलकर के इस कथन ने लाखों स्वयंसेवकों को त्याग और सेवा का मार्ग दिखाया है। त्याग, सेवा और इससे मिलने वाला अनुशासन ही संघ की वास्तविक ताकत है। आज सौ वर्षों से भी अधिक समय से आरएसएस राष्ट्र सेवा में निरंतर जुटा हुआ है।’
हाल ही में कुछ मौकों पर प्रधानमंत्री ने संगठन की उदारतापूर्वक प्रशंसा की है। इससे पहले उन्होंने इस साल स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में संगठन की सराहना की थी, इसके अलावा 11 सितंबर को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के जन्मदिन पर उनके नेतृत्व को सराहा था।
अगले सप्ताह विजयादशमी पर आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो जाएंगे। संगठन को सत्तारूढ़ भाजपा की वैचारिक संस्था माना जाता है। मोदी ने कहा कि जब संघ की स्थापना हुई थी, तब देश सदियों से गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और देश के स्वाभिमान व आत्मविश्वास को गहरी चोट पहुंची थी।
‘आरएसएस का ध्येय रहा कि बौद्धिक गुलामी से मुक्ति मिले’
उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता को पहचान के संकट से जूझना पड़ रहा था। मोदी ने कहा, ‘हमारे देशवासी हीन भावना का शिकार हो रहे थे।
इसलिए देश की आजादी के साथ-साथ यह भी जरूरी था कि यह बौद्धिक गुलामी से मुक्त हो।’ उन्होंने कहा कि देश में कहीं भी प्राकृतिक आपदा आने पर आरएसएस के स्वयंसेवक सबसे पहले पहुंचते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘लाखों स्वयंसेवकों के हर कार्य और हर प्रयास में “राष्ट्र प्रथम” की भावना सदैव सर्वोपरि रहती है।’
मोदी ने ‘मन की बात’ के 126वें संस्करण में एक बार फिर स्वदेशी पर जोर देते हुए लोगों से दो अक्टूबर को गांधी जयंती पर खादी की कोई वस्तु खरीदने का आग्रह किया।
वोकल फॉर लोकल को बनाएं खरीदारी का मंत्र
उन्होंने कहा, ‘वोकल फोर लोकल को खरीदारी का मंत्र बना दीजिए। ठान लीजिए, हमेशा के लिए, जो देश में तैयार हुआ है, वही खरीदेंगे।
जिसे देश के लोगों ने बनाया है, वही घर ले जाएंगे। जिसमें देश के किसी नागरिक की मेहनत है, उसी सामान का उपयोग करेंगे।’
उन्होंने कहा, ‘जब हम ऐसा करते हैं, तो हम सिर्फ कोई सामान नहीं खरीदते, हम किसी परिवार की उम्मीदों को जगाते हैं, किसी कारीगर की मेहनत को सम्मान देते हैं। किसी युवा उद्यमी के सपनों को पंख देते हैं।’
कोलकाता की दुर्गा पूजा पर भी बोले पीएम नरेंद्र मोदी
मोदी ने यह भी कहा कि सरकार छठ पर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल कराने के लिए काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार के इसी तरह के प्रयासों के कारण कोलकाता की दुर्गा पूजा भी इस यूनेस्को सूची का हिस्सा बन गई है। प्रधानमंत्री ने नाविका सागर परिक्रमा के दौरान अदम्य साहस और अडिग संकल्प का उदाहरण पेश करने वालीं नौसेना की महिला अधिकारियों – लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा से भी बात की। उन्होंने उनके प्रयासों की सराहना की और कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रही हैं।
भगवान राम के साथ निषादराज के मंदिर की भी बात
आगामी गांधी जयंती का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आजादी के बाद भारत में खादी के प्रति आकर्षण कम हो गया। उन्होंने कहा, ‘रामायण का यह प्रभाव मंदिर में निहित भगवान राम के आदर्शों और मूल्यों के कारण है। भगवान राम ने सेवा, सद्भाव और करुणा की भावना से सभी को गले लगाया।
इसलिए हमें लगता है कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण के राम माता शबरी और निषादराज के साथ ही पूर्ण हैं।’ उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जब वे राम मंदिर जाएं तो इन मंदिरों के भी दर्शन करें। पीएम मोदी ने इस दौरान असम के प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग को भी श्रद्धांजलि दी।