बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा की हत्या को लेकर कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने इसे आयात लाइसेंस मामले में भ्रष्टाचार को छिपाने की साजिश करार दिया। भाजपा नेता ने दिसंबर, 1974 में संसद में लाए गए विशेषाधिकार प्रस्ताव के दस्तावेज एक्स पर साझा किए और कांग्रेस पर मिश्रा की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया।
निशिकांत ने सोमवार को पोस्ट में लिखा, ‘क्या कांग्रेस ने तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा की हत्या की साजिश रची थी ताकि कमीशन के रैकेट को छिपाया जा सके? भारत सरकार ने 1972-73 में फर्जी आयात-निर्यात लाइसेंस जारी किया था। ललित नारायण मिश्रा उस समय विदेश व्यापार मंत्री थे और पैसे का लेनदेन शुरू हुआ। उस समय हर महीने 1 लाख 20 हजार रुपये?’
निशिकांत दुबे ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सीबीआई की ओर से दायर भ्रष्टाचार मामले की चार्जशीट के आधार पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा, ‘संसद में हंगामा हुआ और 1973 में जांच शुरू हुई।
ललित बाबू का मंत्रालय बदल दिया गया और उन्हें रेल मंत्री बनाया गया। सितंबर 1974 में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की। आरोप सिद्ध हुए कि फर्जी कंपनी बनाकर लेनदेन हुआ था।
9 दिसंबर, 1974 को अटल बिहारी वाजपेयी ने ललित नारायण मिश्रा पर निशाना साधा। उन्होंने CBI चार्जशीट के आधार पर पैसे के लेनदेन का सबूत पेश किया। इसके बाद विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया गया।’
ललित नारायण मिश्रा की हत्या कैसे हुई?
निशिकांत दुबे ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘3 जनवरी 1975 को क्या इस भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए ललित बाबू को बम विस्फोट में उड़ा दिया गया? क्या काला युग था।’ बता दें कि ललित नारायण मिश्रा 1970 के दशक में बिहार के कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से एक थे।
1975 में समस्तीपुर जिले के एक रेलवे स्टेशन पर बम विस्फोट में उनकी मृत्यु हो गई थी। दिसंबर 2014 में सीबीआई अदालत ने संतोषानंद, सुदेवानंद, रंजन द्विवेदी उर्फ राम जनम द्विवेदी और गोपालजी को मिश्रा की हत्या का दोषी पाया था।
अब निशिकांत दुबे ने मिश्रा की हत्या के पीछे कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, सीबीआई कोर्ट ने पाया था कि दोषियों ने आध्यात्मिक नेता प्रभात रंजन सरकार उर्फ आनंद मूर्ति को जेल से रिहा करने के लिए यह साजिश रची थी।