भारत बन रहा है वैश्विक महाशक्ति, रूस-चीन से दूरी रखें; फिनलैंड राष्ट्रपति ने पश्चिम को दी चेतावनी…

फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत को रूस और चीन के साथ एक ही श्रेणी में रखने से साफ इंकार कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिनी देशों से भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करने की अपील की है।

एक इंटरव्यू में स्टब ने कहा कि भारत एक उभरती हुई महाशक्ति है, जिसके पास जनसांख्यिकी और आर्थिक ताकत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिमी देशों के लिए भारत के साथ सहयोग करना बेहद महत्वपूर्ण है।

रूस और चीन के बीच गहरे संबंधों का जिक्र करते हुए स्टब ने कहा, “1990 के दशक की शुरुआत में रूस और चीन की अर्थव्यवस्थाएं लगभग एक समान थीं, लेकिन अब चीन की अर्थव्यवस्था रूस से दस गुना बड़ी है।

रूस द्वारा तेल और गैस की खरीद, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए चीन रूस को युद्ध जारी रखने की संभावना प्रदान करता है। इस तरह दोनों देशों के बीच बहुत गहरा संबंध है।”

हालांकि, उन्होंने भारत को इस समीकरण से अलग रखा। जब पत्रकार ने उनसे भारत, रूस और चीन के बीच उभरते गठबंधन के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, “भारत को मैं रूस और चीन के साथ एक ही टोकरी में नहीं रखूंगा।

भारत यूरोपीय संघ और अमेरिका का एक करीबी सहयोगी है। यह एक उभरती हुई महाशक्ति है, जिसके पास जनसांख्यिकी और आर्थिक ताकत है। मैं हमेशा यह तर्क देता हूं कि पश्चिमी देशों के लिए भारत के साथ जुड़ाव और सहयोग बहुत जरूरी है।”

भारत जैसे देशों के साथ अधिक सम्मानजनक विदेश नीति अपनाओ- स्टब

यह पहली बार नहीं है जब स्टब ने भारत के साथ सहयोगात्मक रुख का संकेत दिया हो। हाल ही में चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भी उनकी यह सोच झलकी थी।

इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उपस्थिति ने पश्चिमी नेताओं और विशेषज्ञों को चौंका दिया था।

खास तौर पर तीनों नेताओं के बीच दिखी “दोस्ती” ने पश्चिमी देशों में चर्चा का माहौल बनाया।

स्टब ने कहा था कि एससीओ शिखर सम्मेलन में जो कुछ देखा गया, वह लंबे समय से पर्दे के पीछे चल रहा था। उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम देशों की एकता को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।

हालांकि उन्होंने उस वक्त भी भारत के साथ सम्मान से पेश आने की बात कही थी। स्टब ने कहा, “ग्लोबल साउथ, खासकर भारत जैसे देशों के साथ अधिक सम्मानजनक विदेश नीति के बिना, हम यह खेल हार सकते हैं।

एससीओ शिखर सम्मेलन ने पश्चिम को यह याद दिलाया कि दांव पर क्या है। हम पुरानी व्यवस्था के अवशेषों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।”

भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने की जरूरत

राष्ट्रपति स्टब ने भारत को एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत न केवल एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका भी दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।

पश्चिमी देशों को भारत के साथ अपने संबंधों को और गहरा करना चाहिए ताकि वैश्विक भू-राजनीति में संतुलन बनाया जा सके।

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