अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा पर की गई चौंकाने वाली घोषणा से टेक कंपनियों के कर्मचारियों में मचे हड़कंप के बीच, एक अमेरिकी अधिकारी ने शनिवार को बताया कि जल्दबाजी में वापस लौटने की कोई जरूरत नहीं है।
एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “एच1बी वीजा पर भारतीयों को रविवार तक अमेरिका लौटने या देश में दोबारा प्रवेश के लिए 1,00,000 डॉलर का भुगतान करने की जरूरत नहीं है।”
यह सफाई ट्रंप प्रशासन द्वारा अमेरिकी कंपनियों पर प्रत्येक एच-1बी वीजा कर्मचारी पर $100,000 वार्षिक शुल्क लगाने के मद्देनजर आई है।
इस कदम का भारतीयों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा क्योंकि इन वीजा धारकों में 70% भारतीय हैं। अमेरिकी अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारी H-1B वीजा शुल्क केवल नए वीजा आवेदनों पर लागू होगा, नवीनीकरण पर नहीं।
अधिकारी की यह टिप्पणी उन कई टेक कंपनियों के कर्मचारियों के लिए राहत की बात हो सकती है, जो पहले Microsoft, Amazon, Meta और JP Morgan जैसी कई तकनीकी कंपनियों के नोटिसों से चिंतित थे।
इनमें कर्मचारियों से अमेरिका में ही रहने का आग्रह किया गया था और जो लोग देश से बाहर हैं, उन्हें 21 सितंबर, रात 12:01 बजे EDT से पहले वापस लौटने को कहा गया था।
एक मेल में, माइक्रोसॉफ्ट ने कहा था कि वह दृढ़ता से अनुशंसा करता है कि H-1B और H-4 वीजा धारक समय सीमा से पहले अमेरिका लौट आएं। अमेजन, मेटा और जेपी मॉर्गन ने भी इसी तरह के नोटिस जारी किए थे।
ट्रंप ने शुक्रवार को एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत एच1बी वीजा शुल्क बढ़ाकर सालाना एक लाख अमेरिकी डॉलर किए जाने का प्रावधान है।
ट्रंप के इस कदम से अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कुछ गैर-आप्रवासी श्रमिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध संबंधी घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि एच-1बी वीजा कार्यक्रम का दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।