ब्रिटेन ने फ्रांस के साथ हाल ही में हुई रिटर्न्स ट्रीटी के तहत पहला निर्वासन पूरा कर लिया है।
गुरुवार को गृह मंत्री शबाना महमूद ने इसे “सीमा सुरक्षा की दिशा में एक अहम और पहला कदम” बताया और कहा कि यह उन लोगों के लिए स्पष्ट संदेश है जो छोटी नौकाओं से इंग्लिश चैनल पार करके ब्रिटेन में अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश करते हैं।
महमूद ने कहा, “यह हमारे बॉर्डर सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। जो लोग छोटी नावों से अवैध तरीके से ब्रिटेन पहुंचते हैं, उनके लिए यह संदेश है कि अगर आप अवैध रूप से प्रवेश करेंगे तो हम आपको हटाने की कोशिश करेंगे।”
गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार अदालतों में होने वाले “आखिरी समय के बेबुनियाद और बाधा डालने वाले प्रयासों” को चुनौती देती रहेगी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिटेन शरणार्थियों को शरण देना जारी रखेगा लेकिन केवल “सुरक्षित, वैध और व्यवस्थित रास्तों से- न कि खतरनाक समुद्री यात्राओं से।”
भारतीय नागरिक बना पहला मामला
ब्रिटेन के गृह कार्यालय के सूत्रों के अनुसार निर्वासित व्यक्ति एक भारतीय नागरिक है, जिसने इस साल अगस्त में अवैध रूप से छोटी नाव के जरिए ब्रिटेन में प्रवेश किया था।
उसे एक कॉमर्शियल विमान से पेरिस भेजा गया। यह कदम ब्रिटेन और फ्रांस के बीच हुए “वन-इन, वन-आउट” समझौते के तहत उठाया गया है।
वापसी के बाद उस व्यक्ति को भारत लौटने के लिए स्वैच्छिक पुनर्वास योजना का विकल्प दिया जाएगा। अगर वह इनकार करता है, तो उसके लिए भविष्य में शरण आवेदन पर रोक लग जाएगी और उसे जबरन वापस भेजा जा सकता है।
जून 2026 तक पायलट समझौता लागू
यह पायलट समझौता अगस्त 2025 से शुरू हुआ है और जून 2026 तक लागू रहेगा। इसके तहत ब्रिटेन उन प्रवासियों को फ्रांस वापस भेज सकता है जो अवैध रूप से पहुंचे हैं।
बदले में ब्रिटेन फ्रांस से उतनी ही संख्या में लोगों को “सुरक्षित और वैध शरण मार्ग” के जरिए स्वीकार करेगा। इ
न सभी पर सख्त पात्रता और सुरक्षा जांच की जाएगी। गृह मंत्रालय का कहना है कि इस पारस्परिक मार्ग के तहत फ्रांस से ब्रिटेन आने वाले पहले समूह के शरणार्थी अगले कुछ दिनों में पहुंच सकते हैं।
भारतीय नागरिकों की संख्या दोगुनी
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अगस्त तक ब्रिटेन के इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटरों में 2,715 भारतीय नागरिक मौजूद थे। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 108 फीसदी अधिक है।
निर्वासित भारतीय व्यक्ति उन शुरुआती प्रवासियों में शामिल है जिन्हें संधि लागू होने के बाद ब्रिटेन बॉर्डर फोर्स ने पकड़ा था।
पिछले साल 35 हजार लोगों की वापसी
गृह कार्यालय के अनुसार पिछले एक वर्ष में ब्रिटेन ने 35,000 से अधिक ऐसे लोगों को वापस भेजा है जिन्हें देश में रहने का कोई अधिकार नहीं था।
इनमें विदेशी अपराधियों की वापसी में 14 फीसदी और शरण संबंधी मामलों में निर्वासन में 28 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।