संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनैनी ने अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता कायम करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठन अफगान भूमि का इस्तेमाल सुरक्षित ठिकाने के रूप में न कर सकें, इसके लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अफगानिस्तान पर बैठक में राजदूत पर्वतनैनी ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस बात पर ध्यान देना होगा कि आईएसआईएल, अलकायदा और इनके सहयोगी संगठन जिनमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद शामिल हैं और जो इन्हें समर्थन देते हैं वे अफगानिस्तान की धरती का दुरुपयोग न कर पाएं।”
उन्होंने पाकिस्तान की ओर अप्रत्यक्ष इशारा करते हुए कहा कि आतंकवाद को समर्थन देने वालों पर भी नकेल कसना जरूरी है।
भारत ने इस दौरान अपनी प्राथमिकता भी बताई। भारतीय दूत के मुताब्क, भारक मकसद साफ है। अफगानिस्तान को मानवीय सहायता उपलब्ध कराना।
अफगान जनता के लिए कौशल विकास कार्यक्रम लागू करना। स्वास्थ्य, शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्र में योगदान बढ़ाना। पर्वतनैनी ने अफगानिस्तान में 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की अफगान अधिकारियों द्वारा निंदा का स्वागत भी किया।
सितंबर 2025 में आए विनाशकारी 6.0 तीव्रता के भूकंप के बाद भारत ने तुरंत मदद भेजी। अब तक 1,000 टेंट और 15 टन खाद्य सामग्री की आपूर्ति की जा चुकी है।
इसके अतिरिक्त 21 टन राहत सामग्री, जिसमें दवाइयां, हाइजीन किट, कंबल और जनरेटर शामिल है, की खेफ भी भेजी जा चुकी है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स एंड क्राइम कार्यालय के साथ मिलकर 84 मीट्रिक टन सहायता और दवाइयां तथा 32 मीट्रिक टन सामाजिक सहायता सामग्री नशामुक्ति कार्यक्रमों के लिए दी है।
भारत अब तक 2,000 अफगान छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान कर चुका है। उनमें 600 से अधिक महिलाएं और छात्राएं शामिल हैं। भारत ने यूएन असिस्टेंस मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) को समर्थन दोहराया और इसकी प्रमुख रोजा ओटुनबायेवा के सहयोग की सराहना की।
राजदूत पर्वतनैनी ने कहा, “अफगानिस्तान को एक नई और अनुकूलनशील रणनीति की आवश्यकता है। ‘बिजनेस ऐज यूज़ुअल’ का रवैया केवल यथास्थिति को बनाए रखेगा, जो अफगान जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपेक्षाओं के अनुकूल नहीं है।”