रूस और यूक्रेन का युद्ध यूरोप और अमेरिका के लिए गले की हड्डी बना हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप यूक्रेन और रूस से बार-बार बात करते इस युद्ध की खत्म करने की कोशिश में लगे हुए हैं, लेकिन बार-बार नाकाम ही हो रहे हैं।
हाल ही में युद्ध के जारी रहने पर यूक्रेन में ट्रंप के विशेष दूत कीथ केलॉग ने रूस और चीनी गठजोड़ की आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि रूस चीनी समर्थन के बिना ज्यादा समय तक जिंदा नहीं रह सकता है। अगर बीजिंग, मॉस्को को समर्थन देना बंद कर दे तो यूक्रेन का युद्ध कल ही खत्म हो जाएगा।
फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक कीव में ‘याल्टा यूरोपीय रणनीति’ कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए कीथ केलॉग ने रूस को चीन का छोटा साझेदार बताया।
केलॉग ने कहा, “अगर आप चीन और रूस को एक साथ देखें, तो रूस छोटा साझेदार है। चीनी छोटे नहीं है… क्योंकि चीनियों के पास आर्थिक और सैन्य ताकत है… स्पष्ट रूप से उनके पास इतिहास और राजनैतिक नेतृत्व भी है।
अगर आज चीन, रूस को समर्थन देना बंद कर दे तो युद्ध कल ही खत्म हो जाएगा। मुझे नहीं लगता कि चीन के समर्थन के बिना रूस इस युद्ध में ज्यादा जीवित रह पाएगा।
हांनहीं
आपको बता दें 2022 में यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के बाद से ही चीन रूस का सबसे बड़ा साझेदार बनकर उभरा है। युद्ध शुरू होने के बाद चीन ने रूस को लगातार ड्रोन, गोला-बारूद, हथियार सप्लाई किए हैं। इतना ही नहीं रूस की यूरोपीय सप्लाई बंद होने के बाद चीन ने लगातार रूसी तेल और गैस की खरीद को बढ़ाया है और उसके अलावा बाकी सामान के लिए भी अपने बाजार खोले हैं। आज रूसी तेल का चीन सबसे बड़ा खरीददार है।
केलॉग ने इसके अलावा रूस की तरफ से लड़ने वाले उत्तर कोरियाई सैनिकों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों का उतरना इस बात की तरफ इशारा करता है कि रूसी सैन्य ताकत उतनी भी मजबूत नहीं है, जितना की पुतिन दावा करते हैं। उन्होंने कहा, “अगर रूसी सेना इतनी ही ताकतवर होती तो उसे उत्तर कोरिया के 10 हजार सैनिकों की जरूरत नहीं पड़ती।
आपको बता दें। इस युद्ध में अमेरिका और रूस के तरफ के दो पक्ष हैं। एक तरफ अमेरिका जहां रूस के चीन पर जरूरत से ज्यादा निर्भर होने की आलोचना करता है तो वहीं रूस भी लगातार दूसरे देशों पर अपनी निर्भरता को बढ़ाकर केवल चीन पर ही डिपेंडेंट नहीं रहना चाहता। आज के समय में चीन जहां उसके कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीददार है, तो दूसरे नंबर पर भारत है, जो कि उसका दूसरे नंबर का सबसे बड़ा खरीद दार है। जहां तक हथियारों की सप्लाई की बात है तो रूस अपने आप में एक बहुत बड़ा हथियार उत्पादक देश है। इसके अलावा युद्ध के शुरुआती समय में आई रिपोर्ट के मुताबिक चीन के अलावा रूस को उत्तर कोरिया की तरफ से भी हथियार सप्लाई किए गए हैं।