आज पितृपक्ष का नवमी श्राद्ध है। नवमी श्राद्ध को नौमी श्राद्ध तथा अविधवा श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष में हम जो भी पितरों के नाम का निकालते हैं, उसे वे सूक्ष्म रूप में आकर ग्रहण करते हैं।
केवल तीन पीढ़ियों का श्राद्ध और पिंड दान करने का ही विधान है। ज्यादातर लोग अपने घरों में ही तर्पण करते हैं। आइए जानते हैं पितृ पक्ष के 9वें दिन कब व किसका श्राद्ध किया जाता है-
आज 3 मुहूर्त में करें नवमी श्राद्ध
कुतुप मूहूर्त – 11:51 ए एम से 12:41 पी एम
अवधि – 00 घण्टे 49 मिनट्स
रौहिण मूहूर्त – 12:41 पी एम से 01:30 पी एम
अवधि – 00 घण्टे 49 मिनट्स
अपराह्न काल – 01:30 पी एम से 03:58 पी एम
अवधि – 02 घण्टे 28 मिनट्स
नवमी तिथि प्रारम्भ – सितम्बर 15, 2025 को 03:06 ए एम बजे
नवमी तिथि समाप्त – सितम्बर 16, 2025 को 01:31 ए एम बजे
जानें पितृपक्ष के 9वें दिन किसका होगा श्राद्ध: नवमी श्राद्ध परिवार के उन मृतक सदस्यों के लिये किया जाता है, जिनकी मृत्यु नवमी तिथि पर हुई हो। इस दिन शुक्ल पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की नवमी तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है।
नवमी श्राद्ध तिथि को मातृनवमी के रूप में भी जाना जाता है। यह तिथि माता का श्राद्ध करने के लिये सबसे उपयुक्त दिन होता है। इस तिथि पर श्राद्ध करने से परिवार की सभी मृतक महिला सदस्यों की आत्मा प्रसन्न होती है।
ऐसे करें नवमी श्राद्ध 2025: श्राद्ध का अनुष्ठान करते समय दिवंगत प्राणी का नाम और उसके गोत्र का उच्चारण किया जाता है। हाथों में कुश की पैंती (उंगली में पहनने के लिए कुश का अंगूठी जैसा आकार बनाना) डालकर काले तिल से मिले हुए जल से पितरों को तर्पण किया जाता है।
मान्यता है कि एक तिल का दान बत्तीस सेर स्वर्ण तिलों के बराबर है। परिवार का उत्तराधिकारी या ज्येष्ठ पुत्र ही श्राद्ध करता है।
जिसके घर में कोई पुरुष न हो, वहां स्त्रियां ही इस रिवाज को निभाती हैं। परिवार का अंतिम पुरुष सदस्य अपना श्राद्ध जीते जी करने के लिए स्वतंत्र माना गया है। सन्यासी वर्ग अपना श्राद्ध अपने जीवन में कर ही लेते हैं। श्राद्ध का समय दोपहर में उपयुक्त माना गया है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।