डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 50 से 100 फीसदी टैरिफ लगाने की अपील पर चीन ने पलटवार किया है।
वाशिंगटन को सीधा और तीखा संदेश देते हुए बीजिंग की तरफ से कहा गया कि उनका देश न तो किसी तरह के युद्ध में भाग लेता है और न ही युद्ध की साजिश रचता है।
इसके अलावा टैरिफ को लेकर कहा कि टैरिफ जैसी चीजें केवल समस्या को सुलझाती नहीं है, केवल उलझाने का काम करती है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक स्लोवेनिया की चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर पहुंचे चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने स्पष्ट रूप से कहा, ” चीन, युद्ध में भाग नहीं लेता है और न ही किसी भी तरह के युद्ध की साजिश रचता है।
युद्ध किसी भी तरह से समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता है, जहां तक टैरिफ की बात है, तो ऐसे युद्ध इन समस्याओं को और भी ज्यादा जटिल बना देंगे।
गौरतलब है कि चीनी विदेश मंत्री का यह बयान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस अपील के बाद आया है, जिसमें उन्होंने नाटो देशों से रूसी तेल खरीद को रोकने के लिए चीन पर 50 से 100 फीसदी टैरिफ लगाने की अपील की थी।
गौरतलब है कि अमेरिका इससे पहले भी जी 7 देशों से अपील कर चुका है कि यूक्रेन और रूस के युद्ध को रोकने के लिए उसे रूस के तेल बाजार को खत्म करना होगा।
इसके लिए रूसी तेल खरीद रहे भारत और चीन के ऊपर बड़े-बड़े टैरिफ लगाने होंगे। हालांकि ट्रंप ने अपने हालिया पोस्ट में केवल चीन के ऊपर टैरिफ लगाने की बात कही है, इसमें भारत का कहीं भी जिक्र नहीं है।
दिन की शुरुआत में सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर किए एक पोस्ट में डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो देशों से अपील करते हुए चीन पर टैरिफ लगाने को कहा।
उन्होंने लिखा, “अगर सभी नाटो देश एकमत हो जाते हैं तो मैं रूस पर बड़े प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हूं। सभी नाटो देश रूस से तेल खरीदना बंद कर दें, जैसा की आप सभी जानते हैं कि WIN के प्रति नाटो की प्रतिबद्धता 100 फीसदी से भी कम रही है और कुछ लोगों द्वारा रूसी तेल की खरीद चौंकाने वाली रही है।
यह रूस पर आपकी बातचीत और सौदेबाजी की शक्ति को बहुत कमजोर करता है। खैर, जब आप तैयार हों तो मैं आगे बढ़ने के लिए तैयार हूं।
बस बताइए कब? मेरा मानना है कि इसके साथ ही नाटो, एक समूह के रूप में, चीन के ऊपर 50 से 100 फीसदी टैरिफ लगाए, जिसे रूस और यूक्रेन के युद्ध के समाप्त होने के बाद ही वापस लिया जाए।”