नेपाल में भीषण हिंसा के बाद बीते दिनों देश के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया था।
इसके बाद देश में अंतरिम सरकार बनाने की तैयारियां चल रही है। इस क्रम में बुधवार को देश की पूर्व मुख्य न्यायधीश रह चुकीं सुशीला कार्की युवाओं की पसंद बन कर उभरी हैं।
अब काठमांडू के मेयर और जेन Z आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे बालेन शाह ने भी सुशीला कार्की को अपना समर्थन दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बालेन शाह ने नेपाल के लोगों से धैर्य रखने की अपील की है।
उन्होंने कहा है कि अंतरिम सरकार देश में नए सिरे से चुनाव करवाएगी और इसके नेतृत्व के लिए वे सुशीला कार्की जी के नाम का पूर्ण समर्थन करते हैं। बालेन ने लिखा, “देश सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है। कृपया इस समय घबराएं नहीं, धैर्य रखें।
देश अंतरिम सरकार की ओर बढ़ रहा है, जो देश में नए चुनाव करवाएगी। इस अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए आपके प्रस्ताव, पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को मेरा पूर्ण समर्थन है। मैं आपके ज्ञान और एकता का तहे दिल से सम्मान करना चाहता हूं। इससे पता चलता है कि आप कितने परिपक्व हैं।”
बालेन शाह की युवाओं से अपील
इस दौरान उन्होंने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचने की भी अपील की। बालेन शाह ने कहा, “ मैं उन मित्रों से क्या कहना चाहता हूं जो अभी जल्दी से सरकार का हिस्सा बनना चाहते हैं कि आपका जुनून, आपकी सोच, आपकी ईमानदारी की देश को अस्थायी रूप से नहीं, बल्कि स्थायी रूप से जरूरत है। उसके लिए चुनाव होते हैं। कृपया जल्दबाजी न करें।”
उन्होंने देश के राष्ट्रपति से जल्द से जल्द अंतरिम सरकार को मंजूरी देने का अनुरोध किया है।
कौन हैं सुशीला कार्की?
इससे पहले रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई थी कि प्रदर्शनकारी बालेन शाह को ही देश की कमान देना चाहते थे। हालांकि बुधवार को सुशीला कार्की का नाम सामने आया है, जो जल्द ही अंतरिम प्रधानमंत्री का पद संभाल सकती हैं।
नेपाल के विराटनगर में जन्मीं सुशीला कार्की देश की एकमात्र महिला मुख्य न्यायधीश रह चुकी हैं। उन्होंने 2016 में सीजेआई का पद संभाला था। बता दें कि कार्की का भारत ने भी नाता है। उन्होंने वाराणसी के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से पोस्टग्रेजुएट की पढ़ाई की है।
नेपाल की मौजूदा स्थिति
इस बीच नेपाल में बुधवार को स्थिति थोड़ी बेहतर होती नजर आई। सैनिकों को देश में कानून-व्यवस्था कायम करने और आंदोलन की आड़ में संभावित हिंसा को रोकने के लिए सड़कों पर गश्त करते देखा गया। देशभर में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद मंगलवार रात से सुरक्षा की कमान संभालने वाली सेना ने देशव्यापी प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए थे और फिर गुरुवार सुबह छह बजे तक के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया था।
बुधवार को सैनिकों ने सड़कों पर लगातार पहरा दिया और लोगों को घर पर ही रहने का आदेश जारी किया, जिससे नेपाल की राजधानी काठमांडू में सन्नाटा पसरा रहा। इससे एक दिन पहले प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास, सरकारी भवनों, उच्चतम न्यायालय, राजनीतिक दलों के कार्यालयों और वरिष्ठ नेताओं के घरों में आग लगा दी थी। हालांकि बुधवार को हिंसा की कोई खबर नहीं आई।