चीन सीमा से लगे क्षेत्र में पूर्ण राज्य के दर्जे की उठी मांग, रेमन मैग्सेसे अवार्ड विजेता ने शुरू किया अनशन…

एपेक्स बॉडी लेह (ABL) ने बुधवार को लेह में एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित किया।

इस दौरान मशहूर पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग पर 35 दिनों का अनशन शुरू कर दिया है।

इससे पहले ABL ने लेह में ‘सर्व धर्म प्रार्थना सभा’ ​​का आयोजन किया, जिसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस मौके पर वांगचुक ने कहा कि यह संदेश देने के लिए एक सर्व-धर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई कि विरोध शांतिपूर्ण, अहिंसक है और उनकी माँगें भारतीय संविधान के दायरे में हैं।

सर्वधर्म प्रार्थना सभा के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में जलवायु कार्यकर्ता, शिक्षाविद् और ‘रेमन मैग्सेसे’ पुरस्कार विजेता वांगचुक ने कहा कि उन्होंने बुधवार से एक और अनशन शुरू करने का निर्णय लिया है क्योंकि उनकी मांगों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले दो महीने से कोई बैठक नहीं बुलाई है।

वांगचुक ने कहा कि लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत राज्य का दर्जा और संरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर केंद्र सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है, इसलिए वह अपना प्रदर्शन तेज करने को मजबूर हो रहे हैं।

उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा, ‘‘कुछ लोगों के लिए एक कंपनी ही देश बन गई है। पूर्वी लद्दाख में लगभग 48,000 एकड़ ज़मीन सौर ऊर्जा परियोजना के लिए चिह्नित की गई है।

यह जमीन फ़िलहाल भारतीय सौर ऊर्जा निगम को दी जा रही है लेकिन कहा जा रहा है कि अंततः इसे किसी निगम को दे दिया जाएगा…।’’

कंपनी का विरोध करना भारत का विरोध कैसे?

वांगचुक ने दुख जताते हुए कहा, ‘‘क्या कंपनी का विरोध करना भारत का विरोध करने के बराबर है? एचआईएएल एक ऐसा संस्थान है जहां छात्रों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ता। हम जलवायु परिवर्तन पर अध्ययन कर रहे हैं और वे हमारी ज़मीन वापस लेना चाहते हैं।’’

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ लद्दाख के लिए ही नहीं बल्कि पूरे हिमालय और देश के लिए चिंता का विषय है। वांगचुक ने आशंका व्यक्त की कि हर संघर्ष में भारतीय सेना के साथ खड़े लद्दाख के लोग इससे प्रभावित होने लगेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘लद्दाख के लोग हमेशा राष्ट्रवादी रहेंगे लेकिन मुझे डर है कि वे दिल्ली और मुंबई के लोगों जैसे हो जाएंगे… जब सीमा पर हमला होता है तो लद्दाख के लोग ही सेना की मदद करते हैं। उनका बोझ उठाते हैं और उनके लिए काम करते हैं। दिल्ली के लोग सीमा पर दुश्मन का सामना करने नहीं आते।’’ वांगचुक ने कहा, ‘‘मुझे डर है कि लद्दाख के लोगों की भावना प्रभावित हो सकती है।’ 

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