सैयद जावेद हुसैन (सह संपादक – छत्तीसगढ़):
धमतरी- ज़िले के लगभग पुलिस थानों में अवैध कार्यों व अपराधों के ख़िलाफ़ वैसे तो कार्यवाहियां होती ही रहती हैं, लेकिन पुलिस विभाग में टिकट प्रथा खत्म होने का नाम नहीं ले रही।
मालूम हो कि बीते लगभग 2 सालों से पुलिस विभाग में टिकट कार्यवाहियां काफी तेज़ी से बढ़ीं हैं, जो यहां पर यातायात विभाग द्वारा शुरू की गईं थीं, जिसके माध्यम से लाखों का वारा न्यारा किया जा चुका है, अब उसी प्रथा को ज़िले के वनांचल व उड़ीसा बॉर्डर के बोरई पुलिस चेक पोस्ट द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस टिकट से प्रति वाहन 200 रुपए की अवैध वसूली की जा रही है, जिन वाहन चालकों के पास टिकट हैं, उनकी किसी भी तरह की जांच नहीं की जाती, उन्हें हरी झंडी दिखा दी जाती है, इसके विपरीत जिन वाहनों में टिकट नहीं होती उन पर तरह तरह की कार्यवाहियों की धौंस जमाई जाती है, और कार्यवाही के डर से वाहन चालक 200 की टिकट खरीद लेते हैं।
किस तरह और किसे लाभ पहुंचाती है टिकट…
मिली जानकारी के अनुसार उड़ीसा राज्य के धमतरी जिले से सटे इलाकों से बड़ी मात्रा में रोज़ाना अवैध कबाड़ समेत मादक पदार्थ गांजा की तस्करी की जाती है, कबाड़ भरे वाहनों में कबाड़ का न कोई बिल होता है, और न वाहन क्षमता के अनुरूप माल।
ऐसे वाहन चालकों और बोरई थाने की सांठ गांठ के चलते शायद बीच का रास्ता निकाला गया है, जो है टिकट, जिसे पुलिस की भाषा में एंट्री कहा जाता है।
हर महीने की एक अलग टिकट बनाई गई है, जिसमें महीने के नंबर, और वर्ष प्रिंट है, इसके अलावा इस टिकट में उस महीने के किसी एक पर्व की बधाई भी दी जाती है! इस टिकट को अवैध तस्करी करने वाले वाहन चालक 200 रुपए में खरीदते हैं, जिसकी वैलेडिटी 1 महीने की होती है, इस 1 महीने के दौरान वो वाहन चाहे जितनी बार हो उस थाने के चेकपोस्ट से बग़ैर किसी जांच के धड़ल्ले से गुज़रते रहता है। फिर गाड़ी में चाहे कबाड़ हो, गांजा हो या फिर और कोई माल।
गांजा तस्करी की कार्यवाहियों में कमी…
बता दें कि बीते कई वर्षों से अवैध रूप से गांजा तस्करी करने वाले सैकड़ों वाहनों को थाना बोरई द्वारा पकड़ा गया है, लेकिन अब गांजा की कार्यवाहियों में भारी कमी देखी जा रही है।
पहले पुलिस विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में हर सप्ताह लगभग 2-4 कार्यवाहियां गांजा की अवैध तस्करी की होती थीं, जो घटकर अब महीनों में एकाध कार्यवाही तक पहुंच चुकी है। शायद ये टिकट का कमाल ही हो! वरना गांजा की खपत तो कम नहीं हुई है, हर गली मोहल्लों में आज भी गांजा पहले से अधिक मात्रा में बिक रहा है।
पुलिस महानिरीक्षक की 2 टूक…
बीते माह 24 तारीख को रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा जिले के दौरे पर थे, जिन्होंने कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक में साफ कहा था कि किसी भी तरह से अवैध कार्य, अवैध शराब, गांजा व नशे के कारोबार पर पूरी तरह से रोक लगाने ठोस क़दम उठाए जाएं, अब सवाल ये है कि 200 की 1 महीने की टिकट देने के बाद उन तमाम गाड़ियों की कोई जांच नहीं हो रही, तो आखिर कैसे ये मान लिया जाए कि अवैध तस्करी पर लगाम लगेगी?
बहरहाल अब देखना होगा कि थाना बोरई की ये टिकट कार्यवाही जारी रहती है या इस पर लगाम लगाई जाएगी?