रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर काफी नाराज हैं।
उन्होंने 50 फीसदी टैरिफ लगाया हुआ है। साथ ही, चीन से भी ट्रंप के संबंध अच्छे नहीं हैं।
बुधवार को चीन में सैन्य परेड में भाग लेने के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप और उनके प्रशासन को अच्छी तरह से समझाते हुए कह दिया कि कोई भी देश भारत और चीन से इस तरह से बात नहीं कर सकता है।
उल्लेखनीय है कि ट्रंप और उनके प्रशासन की ओर से लगातार दोनों देशों के खिलाफ बातें कही जा रही हैं।
पुतिन ने दोनों देशों को अपना साझेदार बताते हुए कहा कि टैरिफ व्यवस्था इन देशों के नेतृत्व को कमजोर करने का एक तरीका है। उन्होंने कहा कि ऐसा करना एक गलती है।
पुतिन ने कहा कि बीजिंग और नई दिल्ली, दोनों के अपने घरेलू राजनीतिक तंत्र और कानून हैं और दोनों देशों ने अपने इतिहास में कठिन दौर देखे हैं, जो उपनिवेशवाद और संप्रभुता पर बार-बार हमलों से चिह्नित हैं।
पुतिन ने कहा, “जब कोई (डोनाल्ड ट्रंप) आपसे कहता है कि वे आपको दंडित करने वाले हैं… तो आपको उन बड़े देशों के नेतृत्व के बारे में सोचना होगा।”
रूसी राष्ट्रपति ने चीन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “आपके पास 1.5 अरब की आबादी वाले भारत और चीन जैसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था वाले देश हैं। आपको यह समझना होगा कि अगर उनमें से कोई कमजोरी दिखाता है, तो उसका राजनीतिक करियर खत्म हो जाएगा, जिसका असर उसके व्यवहार पर पड़ता है।”
उन्होंने आगे कहा कि जैसे औपनिवेशिक युग का अंत हो गया है, उसी तरह उन्हें (अमेरिका) को यह समझना होगा कि आप इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकते। लेकिन आखिरकार सब सुलझ जाएगा और फिर से सामान्य हो जाएगा।”
पिछले दिनों ही चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट की अहम बैठक हुई थी, जिसमें भारत, चीन और रूस की तिकड़ी दिखी थी।
प्रधानमंत्री मोदी कई सालों बाद चीन गए थे, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई थी।
इस मुलाकात से अमेरिका को भी मिर्ची लगी है। टैरिफ को लेकर अमेरिका से संबंध खराब होने के बीच भारत और चीन के रिश्ते फिर से बेहतर हो रहे हैं। वहीं, रूस और और भारत के संबंध दशकों से अच्छे है हीं।