रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पाकिस्तान को एक पारंपरिक साझेदार करार देते हुए दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई है।
मंगलवार को बीजिंग में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान पुतिन ने यह बात कही। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
वहीं शहबाज शरीफ ने इस बैठक में भारत और रूस के बीच मजबूत संबंधों की सराहना की और कहा कि पाकिस्तान इसका पूरा सम्मान करता है।
उन्होंने कहा, “हम जानते हैं कि रूस के भारत के साथ बहुत मजबूत संबंध हैं। हम इसका सम्मान करते हैं, लेकिन पाकिस्तान भी रूस के साथ रचनात्मक और मजबूत संबंध चाहता है।”
व्यापार और सहयोग पर जोर
पुतिन ने इस मुलाकात में पाकिस्तान के साथ रूस के संबंधों को ‘बहुत अच्छा’ बताया और इसे और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
पुतिन ने कहा, “मैं कहना चाहता हूं कि एशिया में पाकिस्तान हमारा पारंपरिक साझेदार बना हुआ है। हम अपने देशों के बीच संबंधों को संजोते हैं। अपनी पिछली मुलाकात में हमने अपने रिश्तों को और अधिक व्यवसायिक बनाने पर सहमति जताई थी। इस संबंध में हमने कुछ प्रगति भी की है लेकिन कुछ परिस्थितियों के चलते हमारे व्यापार में थोड़ी कमी आई है। यह हमारे लिए अच्छा संकेत है कि हम और अधिक मेहनत करें और उन बधाओं को पहचानें और उनमें बदलाव करें।”
पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, और इसे और बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।
रूस ने पहले ही पाकिस्तान को सस्ते दामों पर तेल की आपूर्ति शुरू की है और हाल ही में दोनों देशों के बीच सीधी कार्गो सेवा भी शुरू हुई है। शहबाज शरीफ ने व्यापार, ऊर्जा, कृषि, निवेश, रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, संस्कृति, और जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई।
रूस-पाकिस्तान संबंधों का इतिहास
ऐतिहासिक रूप से रूस और पाकिस्तान के बीच संबंध उतने घनिष्ठ नहीं रहे हैं। शीत युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया था, जिसके कारण सोवियत संघ (अब रूस) के साथ उसके रिश्ते तनावपूर्ण रहे। हालांकि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच संबंधों में गर्मजोशी देखी गई है।
पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने 2022 में रूस का दौरा किया था, जो उस समय चर्चा में रहा क्योंकि यह दौरा रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के दिन हुआ था। इसके अलावा, रूस की नौसेना के युद्धपोतों ने इस साल मार्च में पाकिस्तान का दौरा किया, जिसे दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग का मील का पत्थर माना गया।
भारत के लिए क्या मायने?
रूस और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियां भारत के लिए चिंता की बात हो सकती है। दरअसल भारत और रूस के बीच दशकों पुराने मजबूत रक्षा और कूटनीतिक संबंध हैं।
रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार रहा है, और दोनों देशों के बीच हर साल उच्च स्तरीय मुलाकातें होती हैं। पुतिन ने पहले भी भारत को ‘समय के साथ परखा हुआ दोस्त’ और ‘महान शक्ति’ बताया है।
हालांकि, रूस ने पहले कई मौकों पर यह स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के साथ उसके संबंध भारत-रूस दोस्ती को प्रभावित नहीं करेंगे। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि रूस, पाकिस्तान को एक नए बाजार के रूप में देख रहा है, खासकर तब जब वह पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान को अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक संकट से उबरने के लिए रूस जैसे साझेदार की जरूरत है।