भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की पूर्ण सदस्यता के लिए अजरबैजान की कोशिशों को एक बार फिर ब्लॉक कर दिया है।
अजरबैजानी मीडिया ने दावा करते हुए कहा है कि भारत का यह कदम अजरबैजान के पाकिस्तान के साथ घनिष्ठ संबंधों के कारण उठाया गया है।
इतना ही नहीं, खुद अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने भारत पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर “बदला लेने” का आरोप लगाया है।
अलीयेव का भारत पर आरोप
चीन के तियानजिन शहर में 1 सितंबर को आयोजित SCO शिखर सम्मेलन के दौरान, अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ एक बैठक में भारत की कार्रवाइयों की आलोचना की।
अलीयेव ने भारत पर आरोप लगाया है कि वह अंतरराष्ट्रीय संगठनों में अजरबैजान के खिलाफ “बदला लेने” की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसका कारण अजरबैजान का पाकिस्तान को लगातार समर्थन देना है।
उन्होंने कहा कि भारत के अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाए गए कदमों के बावजूद, अजरबैजान इस्लामाबाद के साथ अपने रिश्तों में “भाईचारे” को प्राथमिकता देता है।
शहबाज शरीफ ने अलीयेव को पाकिस्तान सरकार और जनता की ओर से धन्यवाद दिया और कहा कि अप्रैल-मई में भारत के साथ हुए सैन्य टकराव के दौरान अजरबैजान ने जिस तरह पाकिस्तान के साथ एकजुटता दिखाई, वह सराहनीय है।
SCO में भारत और पाकिस्तान की भूमिका
SCO एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें भारत और पाकिस्तान दोनों पूर्ण सदस्य हैं। अजरबैजान वर्तमान में SCO में “संवाद भागीदार” का दर्जा रखता है और लंबे समय से पूर्ण सदस्यता की मांग कर रहा है।
हालांकि, भारत ने कथिततौर पर अजरबैजान की इस कोशिश का विरोध किया, क्योंकि वह अजरबैजान के पाकिस्तान और तुर्की के साथ रणनीतिक गठजोड़ को अपने हितों के लिए खतरा मानता है।
विशेष रूप से, अजरबैजान का पाकिस्तान के साथ कश्मीर मुद्दे पर समर्थन और चीन की बेल्ट एंड रोड पहल से जुड़े प्रोजेक्ट्स में उसकी भागीदारी भारत की चिंताओं का कारण रही है।