कैलिफोर्निया के गवर्नर ने मोदी-पुतिन वीडियो के बहाने ट्रंप पर साधा वार, बोले- चिंता की बात नहीं…

अमेरिका में अपराध और अवैध प्रवास पर सख्त कार्रवाई की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना को लेकर राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है।

इसी बीच कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजम ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक वीडियो क्लिप शेयर करते हुए ट्रंप पर करारा तंज कसा।

न्यूजम डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं और 2028 में राष्ट्रपति पद की दौड़ में उतरने के दावेदार माने जा रहे हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, “लेकिन चिंता मत कीजिए, ट्रंप शिकागो में गार्ड भेज रहे हैं।”

इस पोस्ट के साथ उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन का वीडियो साझा किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन हाथ थामे हंसते हुए शी जिनपिंग की ओर बढ़ते दिखाई देते हैं। इसके बाद तीनों नेता आपस में बातचीत करते और हंसते नजर आते हैं।

शिकागो और न्यूयॉर्क में नेशनल गार्ड की तैनाती की तैयारी

दरअसल, पिछले हफ्ते राष्ट्रपति ट्रंप ने इशारा किया था कि वे देश के तीसरे सबसे बड़े शहर शिकागो और फिर न्यूयॉर्क में नेशनल गार्ड की तैनाती कर सकते हैं।

वाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “हम अपने शहरों को बेहद सुरक्षित बनाएंगे… मेरा मानना है कि अगला शिकागो होगा और फिर हम न्यूयॉर्क में मदद करेंगे।”

ट्रंप का यह बयान डेमोक्रेट्स की कड़ी आलोचना का कारण बना है। गवर्नर न्यूजम खासतौर पर तब से और ज्यादा मुखर हो गए हैं जब ट्रंप ने विवादास्पद कदम उठाते हुए लॉस एंजिलिस में इमिग्रेशन छापों के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों को शांत करने के लिए लगभग 5,000 सैनिक तैनात कर दिए थे।

भारत पर ट्रंप की 50% टैरिफ मार

इस बार का SCO शिखर सम्मेलन चीन के बंदरगाह शहर तियानजिन में हुआ, जिसमें 20 से अधिक गैर-पश्चिमी देशों के नेता शामिल हुए। बैठक ऐसे समय हुई है जब ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है।

पहले से लगे 25% जवाबी टैरिफ के साथ अब भारत पर कुल 50% शुल्क लगाया गया है, जो दुनिया में सबसे ऊंचे शुल्कों में गिना जा रहा है।

भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इन शुल्कों को “अनुचित और अव्यावहारिक” बताया है। नई दिल्ली ने कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।

दिलचस्प बात यह है कि भारत और चीन दोनों ही रूस से कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं। लेकिन जहां भारत पर डबल टैरिफ लगाया गया है, वहीं बीजिंग को ट्रंप प्रशासन ने छूट दे दी है।

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