पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी को अपना चार दिन का सांस्कृतिक कार्यक्रम पोस्टपोन करना पड़ा है।
जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल जमीयत उलेमा-ए-हिंद शायर और बॉलिवुड के मशहूर गीतकार जावेद अख्तर के आमंत्रण का विरोध कर रहा था।
इसके बाद उर्दू अकादमी ने यह फैसला लिया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख इस समय टीएमसी नेता सिद्दीकुल्लाह चौधरी हैं। वह पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री भी हैं।
शनिवार को जमीत उलेमा-ए-हिंद की तरफ से अकादमी को पत्र लिखकर कहा गया था कि जावेद अख्तर की उपस्थिति से अल्पसंख्यक समुदाय आहत हो सकता है।
पत्र में कहा गया कि जावेद अख्तर इस्लाम को लेकर अपमानजनक टिप्पणी कर चुके हैं। ऐसे में अल्पसंख्यक समुदाय उन्हें बर्दाश्त नहीं कर सकता।
बता दें कि शनिवार को ही अकादमी में ‘हिंदी सिनेमा में उर्दू’ नाम का कार्यक्रम शुरू हुआ था। इस इवेंट में पॉप्युलर कल्चर में उर्दू के महत्व को रेखांकित किया जाना था।
वहीं जावेद अख्तर को मुशायरे की अध्यक्षता करने के लिए बुलाया गया था। अकादमी ने कार्यक्रम को पोस्टपोन करने का ऐलान किया है हालांकि इसके पीछे की वजह नहीं बताई है।
पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी की स्थापना 1987 में हुई थी। उस समय पश्चिम बंगाल में वामपंथी सरकार थी। पश्चिम बंगाल में जमीयत के महासचिव मुफ्ती अब्दुस सलाम ने कहा कि जावेद अख्तर ने इस्लाम का अपमान किया है और इसलिए वे उनका विरोध करते हैं।
उन्होंने कहा, जावेद अख्तर प्रसिद्ध व्यक्ति हैं और उर्दू में उनका योगदान भी महत्वपूर्ण है। हालांकि उन्होंने इस्लाम को लेकर टिप्पणी करके गलत किया। जब लोगों को पता चला कि जावेद अख्तर को बुलाया गया है तो विरोध शुरू हो गया। वैसे भी पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी अल्पसंख्यकों के लिए ही है। ऐसे में उसे अल्पसंख्यकों की भावनाओं की भी कद्र करनी होगी।