बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने गुरुवार को जनता का पैसा बचाने के नाम पर तीन भूमि बंदरगाहों को बंद करने का फैसला लिया है।
इसके अलावा एक और बंदरगाह, जिसका निर्माण कार्य चल रहा था उसे भी रोक दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन बंदरगाहों पर कोई भी व्यापारिक गतिविधि नहीं हो रही थी, इसलिए खर्च में कटौती करने के लिए और करदाताओं पर से बोझ कम करने के लिए इन्हें बंद करने का फैसला लिया गया है।
गौरतलब है कि यह भूमि बंदरगाह भारत की सीमा पर स्थित हैं। मई और जून में भारत ने बांग्लादेश को दी जाने वाली ट्रांस शिपमेंट सेवा को निरस्त कर दिया था और व्यापार के लिए केवल कोलकाता और मुंबई के बंदरगाह का इस्तेमाल करने के लिए कहा था।
यूनुस सरकार के मुख्य प्रेस सलाहकार शफीकुल आलम ने कहा कि बंदरगाहों को बंद करने का यह निर्णय प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में लिया गया।
बंद किए जाने वाले बंदरगाहों में नीलफामारी में चिलाहाटी बंदरगाह शामिल है, जो कि पश्चिम बंगाल के हल्दीबाड़ी से जुडा हुआ है। इसके अलावा चुआडांगा में दौलतगंज भूमि बंदरगाह है, जो पश्चिम बंगाल के मझदिया से जुडा है। इसके अलावा रंगमती में तेगामुख भूमि बंदरगाह है जो मिजोरम के देमागरी से जुड़ा हुआ है।
बांग्लादेश सरकार के मुताबिक इसके अलावा त्रिपुरा के खोवाई से जुड़े हबीगंज में बल्ला भूमि बंदरगाह पर का भी संचालन बंद कर दिया गया है। इस बंदरगाह पर अभी भारत की तरफ से काम पूरा नहीं किया गया है।
आलम ने कहा, “सीमावर्ती क्षेत्रों के राजनेता कभी-कबी राजनीतिक कारणों से इन बंदरगाहों को खोलने और संचालित करने का दबाव डालते हैं लेकिन वास्तव में इन सुविधाओं के माध्यम से कोई व्यापार नहीं हुआ है और इनसे सरकार की लागत बढ़ रही है। गौरतलब है कि यह चाल भूमि बंदरगाह उन आठ बंदरगाहों में शामिल हैं, जिन्हें बांग्लादेश ने निष्क्रिय घोषित कर दिया है।”
आपको बता दें बांग्लादेश की तरफ से जिन भूमि बंदरगाहों को बंद करने का ऐलान किया गया है। वहां से मुख्य रूप से भारत के साथ व्यापार करने की उम्मीद थी।
चूकि भारत ने मई और जून में बांग्लादेश को मिलने वाली ट्रांस शिपमेंट फैसेलिटी पर प्रतिबंध लगा दिया तो ऐसी स्थिति में इन बंदरगाहों के लिए स्थिति और विकट हो गई। इसके बाद भारत ने विशेषकर जूट उत्पादों और गारमेंट्स जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों का भू-मार्ग से आयात अब सीमा शुल्क कारणों और असुविधाओं के चलते लगभग बंद सा हो गया है, जिससे इन बंदरगाहों की भूमिका और भी कम हो गई।