भारत पर ट्रंप के टैरिफ को US अर्थशास्त्री ने बताया ‘आत्मघाती कदम’, बोले- चूहे का हाथी को मुक्का मारने जैसा…

दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत और अमेरिका आज टैरिफ को लेकर आमने-सामने खड़े हुए हैं। अमेरिका का ट्रंप प्रशासन जहां भारत के ऊपर हमला करने और तंज कसने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है।

वहीं दूसरी ओर अमेरिका के स्वतंत्र अर्थशास्त्री और विश्लेषक ट्रंप के इस कदम को अमेरिका के हितों को पूरी तरह से बर्बाद करने वाला बता रहे हैं।

अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ ने नई दिल्ली पर लगाए गए इस ट्रंप टैरिफ की आलोचना करते हुए इसे अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने वाला बताया।

भारत और अमेरिका के बिगड़ते रिश्तों को लेकर चिंतित रिचर्ड ने एक पॉडकास्ट के जरिए अपनी राय को दुनिया के सामने रखा।

उन्होंने कहा कि अमेरिका की आर्थिक हालात लगातार खराब हो रही है, क्योंकि चीन जैसे देश लगातार अपना धन यहां से निकाल रहे हैं।

हम कर्जे पर अर्थव्यवस्था नहीं चला सकते। रिचर्ड के मुताबिक ब्रिक्स देशों का समूह ग्लोबल इकॉनोमिक आउटपुट के मामले में आज जी-7 से कहीं आगे निकल चुका है।

रिचर्ड ने कहा कि यह दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है कि अमेरिका और उसके साथी देश एक ऐसे समूह का हिस्सा हैं, जिसका ग्लोबल प्रोडक्शन में कम साझेदारी है।

उन्होंने कहा, “अगर आप चीन, भारत और रूस और बाकी ब्रिक्स देशों को साथ में लेते हैं तो वैश्विक उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी करीब 35 फीसदी है, वहीं दूसरी तरफ जी-7 देशों को देखें तो इनकी हिस्सेदारी केवल 28 फीसदी है।”

वैश्विक स्तर पर इस बदलते माहौल के लिए रिचर्ड ने भारत और चीन को केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की आपत्ति के बाद भी भारत और चीन का रूसी तेल खरीद को जारी रखना यहाँ दिखाता है कि ताकत किस तरफ जा रही है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के शब्दों में कहे तो दुनिया का सबसे बड़ा देश, सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को आप यह कहना चाहते हैं कि क्या करना है क्या नहीं? यह तो जैसे चूहा एक हाथी को मुक्का मारता है वैसा है।

वोल्फ ने ट्रंप प्रशासन के कदमों को ब्रिक्स को मजबूत करने और अमेरिका, जी-7 के विकल्प के रूप खड़े करने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने जैसे टैरिफ भारत के ऊपर लगाए हैं उससे एक बात साफ है कि यह कदम भारत और अन्य सदस्य देशों को एक-दूसरे के और करीब ला सकते हैं।

उन्होंने कहा, “अगर आप बड़े टैरिफ लगाकर अमेरिका के रास्ते भारत के लिए बंद कर देंगे, तो भारत को अपने निर्यात बेचने के लिए दूसरे विकल्प तलाशने होंगे। आप ब्रिक्स को पश्चिम के मुकाबले में एक नया विकल्प बनने के लिए ताकत दे रहे हैं।

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